
नई दिल्ली। एडटेक कंपनी बायजूस को दिवालियापन से उबरने की उम्मीदों पर बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के उस आदेश को पलट दिया, जिसमें कंपनी के खिलाफ दिवालियापन कार्यवाही बंद करने का निर्देश दिया गया था। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने इस मामले में अमेरिकी कंपनी ग्लास ट्रस्ट कंपनी एलएलसी की याचिका पर यह फैसला सुनाया।
BCCI के साथ सेटलमेंट पर भी रोक
सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के साथ बायजूस के 158.9 करोड़ रुपए के बकाया के निपटान पर भी रोक लगा दी। कोर्ट ने आदेश दिया कि यह राशि अब लेनदारों की समिति के खाते में जमा की जाएगी। बायजूस का बीसीसीआई के साथ करार मार्च 2023 में खत्म हो गया था, लेकिन अब तक बकाया राशि का भुगतान नहीं हो सका है। फिलहाल कंपनी दिवालियापन संकट से जूझ रही है।
दिवालियापन की ओर बायजूस
कोविड-19 के दौरान ऑनलाइन एजुकेशन की भारी मांग से बायजूस की वैल्यू 22 अरब डॉलर तक पहुंच गई थी, जोकि अब शून्य हो चुकी है। लेकिन महामारी के खत्म होते ही कंपनी की स्थिति बिगड़ने लगी। भारी कर्ज, कई अधिग्रहण और निवेशकों के हाथ खींचने से कंपनी की मुश्किलें बढ़ गईं। अगस्त 2023 में NCLT ने कंपनी को बीसीसीआई के साथ निपटान की अनुमति देते हुए दिवालियापन कार्यवाही बंद कर दी थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश ने इस राहत को चुनौती दी है।
कंपनी करेगी वापसी- बायजू रवींद्रन
बायजूस ने घाटे के सौदों के तहत भी कई ऐसी कंपनियों का अधिग्रहण किया, जिससे बायजूस को बड़ा नुकसान झेलना पड़ा। कंपनी के फाउंडर बायजू रवींद्रन ने हाल ही में एक वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस में खुलासा किया था कि निवेशकों के निकलने से कंपनी आर्थिक संकट से जूझ रही है। हालांकि, उन्होंने यह दावा किया कि उनकी कंपनी जल्द ही वापसी करेगी।
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