भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भाजपा की नई जिला कार्यकारिणी का ऐलान होते ही सियासी तापमान अचानक बढ़ गया। शहर अध्यक्ष रविंद्र यति ने मंगलवार को टीम घोषित की, लेकिन कुछ ही घंटों में हालात ऐसे बने कि पूरी कार्यकारिणी को ‘होल्ड’ पर रखना पड़ा। संगठन के भीतर उठी नाराजगी की लहर ने यह साफ कर दिया कि मामला सिर्फ पदों का नहीं, बल्कि वर्चस्व की जंग का है।
सूत्रों की मानें तो घोषित सूची में कई दिग्गज नेताओं के समर्थकों को उपेक्षित किया गया। खासकर मंत्री विश्वास सारंग और विधायक रामेश्वर शर्मा के क्षेत्रों को लेकर असंतोष खुलकर सामने आया। बताया जा रहा है कि हुजूर विधानसभा क्षेत्र का कार्यकारिणी में प्रतिनिधित्व न के बराबर रहा, जबकि नरेला क्षेत्र से भी सीमित नाम शामिल किए गए। इससे समर्थकों में बेचैनी बढ़ी और विरोध के स्वर तेज हो गए।
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पार्टी के भीतर चर्चा है कि इस सूची पर कुछ प्रभावशाली नेताओं का दबदबा रहा। एक मौजूदा विधायक, एक पूर्व विधायक और एक कद्दावर नेता के बीच चल रही सियासी रस्साकशी ने संगठन की तस्वीर धुंधली कर दी। कई कार्यकर्ताओं का आरोप है कि जो लोग पहले टिकट वितरण को लेकर विवादों में रहे, उन्हें तवज्जो दी गई, जबकि जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी हुई।
मामला इतना बढ़ा कि प्रदेश नेतृत्व को हस्तक्षेप करना पड़ा। कई नेताओं ने भोपाल से लेकर प्रदेश कार्यालय तक अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कार्यकारिणी की घोषणा को सोशल मीडिया पर साझा भी किया था, लेकिन बढ़ते विवाद के बीच पोस्ट हटा ली गई। इसके बाद जिला अध्यक्ष और पार्टी के आधिकारिक पेज से भी संबंधित पोस्ट गायब हो गई।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि निकाय चुनावों के बाद से ही संगठन और जनप्रतिनिधियों के बीच संतुलन को लेकर खींचतान चल रही है। ऐसे में भोपाल की यह घटना भाजपा के लिए अंदरूनी तालमेल की बड़ी परीक्षा बन गई है। फिलहाल नई कार्यकारिणी पर ब्रेक लगा है, लेकिन सवाल यह है कि क्या पार्टी इस असंतोष को समय रहते थाम पाएगी या, ये चिंगारी आगे और भड़केगी? फिलहाल एमपी की राजधानी की सियासत में हलचल अभी थमती नजर नहीं आ रही।