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धार भोजशाला :-98 दिन की खुदाई का ‘वीडियो सच’ सामने लाने के आदेश

इंदौर हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, 98 दिन की सर्वे वीडियोग्राफी सभी पक्षों को देने के निर्देश; अब सबूतों के आधार पर होगी कानूनी बहस।
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98 दिन की खुदाई का ‘वीडियो सच’ सामने लाने के आदेश

इंदौर - धार की ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर जारी विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई के बीच अदालत ने एक अहम और निर्णायक आदेश देते हुए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को 98 दिनों तक चले सर्वे की पूरी वीडियोग्राफी मुस्लिम पक्ष को सौंपने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने साफ कहा है कि 27 अप्रैल तक हर हाल में सभी पक्षों को वीडियो क्लिप्स उपलब्ध कराई जाएं, ताकि वे अपने तर्क सीधे सबूतों के आधार पर पेश कर सकें। इस आदेश को मामले की दिशा तय करने वाला कदम माना जा रहा है।

अधिकार को लेकर लंबे समय से विवाद

दरअसल, भोजशाला परिसर के स्वामित्व और अधिकार को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। इस मामले में कमाल मौला वेलफेयर ट्रस्ट की याचिका पर डबल बेंच सुनवाई कर रही है। सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पैरवी करते हुए अयोध्या मामले में दिए गए फैसले का हवाला दिया। उन्होंने दलील दी कि एएसआई रिपोर्ट की वैधता और उसके मूल्यांकन के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय सिद्धांत इस मामले में भी लागू होते हैं।

एडवोकेट ने अपने तर्क

इंदौर हाईकोर्ट में मौजूद एडवोकेट नूर मोहम्मद शेख ने भी अपने तर्क रखते हुए कहा कि फिलहाल बहस पूरी तरह कानूनी पहलुओं पर केंद्रित है। इसमें टाइटल विवाद, साक्ष्यों की स्वीकार्यता और याचिका की सुनवाई की वैधता जैसे अहम मुद्दे शामिल हैं। उन्होंने बताया कि यह मामला केवल आस्था का नहीं, बल्कि ठोस कानूनी आधार और प्रमाणों का है, जहां हर पक्ष अपने दावे को मजबूत करने में जुटा है।

 

सर्वे प्रक्रिया गंभीर सवाल

वहीं, मुस्लिम पक्ष के याचिकाकर्ता अब्दुल समद ने सर्वे प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि खुदाई के दौरान कई स्थानों पर ऐसी प्रक्रिया अपनाई गई, जिससे भोजशाला संरचना को नुकसान पहुंचा। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ अवशेषों को चुनिंदा तरीके से रिकॉर्ड में शामिल किया गया, जबकि मुस्लिम पक्ष से जुड़े साक्ष्यों को नजरअंदाज किया गया।

‘सच’ भी होगा उजागर 

समद का कहना है कि अब जब पूरी वीडियोग्राफी सामने आएगी, तो ‘सच’ भी उजागर होगा। उनके मुताबिक खुदाई में हिंदू, मुस्लिम, जैन और बौद्ध,चारों पक्षों से जुड़े अवशेष मिले हैं, लेकिन उन्हें तथ्यों के रूप में सही तरीके से प्रस्तुत नहीं किया गया। ऐसे में वीडियो रिकॉर्डिंग उनके दावों को मजबूती दे सकती है।

Hemant Nagle
By Hemant Nagle

हेमंत नागले | पिछले बीस वर्षों से अधिक समय से सक्रिय पत्रकारिता में हैं। वर्ष 2004 में मास्टर ऑफ जर्...Read More

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