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Peoples Update Special :बेतवा को जिंदा करने का प्लान नहीं उतरा जमीन पर, झिरी गांव में फिर सूखी जलधारा

प्राचीन बेतवा नदी की जलधारा रायसेन जिले के झीरी गांव के पास अपने उद्गम स्थल पर फिर सूख गई। सरकार ने आठ माह पहले एनजीओ के साथ बेतवा रिवाइवल करार किया था, लेकिन इस पर काम शुरू नहीं हो सका है।
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बेतवा को जिंदा करने का प्लान नहीं उतरा जमीन पर, झिरी गांव में फिर सूखी जलधारा
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    राजीव सोनी, भोपाल। प्राचीन बेतवा नदी की जलधारा अपने उद्गम स्थल पर फिर सूख गई। भोपाल से 25 किलोमीटर दूर ग्राम झिरी (रायसेन) से निकलकर मप्र-उप्र के 600 किमी क्षेत्र में कई जिलों की  ‘लाइफ लाइन’ यह पवित्र नदी दम तोड़ने लगी है। राज्य सरकार ने आर्ट ऑफ लिविंग संस्था से नदी को बचाने एमओयू भी किया लेकिन 8-10 माह बाद भी काम शुरू नहीं हुआ। बैठकों का सिलसिला ही चल रहा है।

    गोमुख पहुंचे लोग तो बंद मिली जलधारा

    मकर संक्रांति के दो दिन पहले झिरी गांव और आसपास के ग्रामीण व सैलानी जब गोमुख पर पहुंचे तो जलधारा बंद मिली। क्षेत्र में जंगल कटाई और आसपास के खेतों में नलकूपों से बड़ी मात्रा में हो रहे भू-जल के दोहन के चलते नदी के अस्तित्व पर संकट मंडराने लगा है। बेतवा की उखड़ती सांसों की खबर सुनकर ‘वाटरमैन’ डॉ. राजेंद्र सिंह भी चिंता जता चुके हैं। उन्होंने वन कटाई और गोमुख के आसपास कंक्रीट स्ट्रक्चर को बड़ी बाधा बताया था।  

    उद्गम स्थल : 5-6 महीने बाद उड़ने लगी धूल

    बारिश में गोमुख से बेतवा की जल धारा बहने लगी थी लेकिन 5 महीने बाद ही वहां फिर धूल उड़ने लगी है।   उद्गम पर जलधारा लौटाने के लिए आयकर विभाग के रिटायर प्रिंसिपल चीफ कमिश्नर आरके पालीवाल के साथ बड़ी संख्या में ग्रामीण और स्वयंसेवी संगठनों ने भी ऑपरेशन चैक डैम और कई महीने तक वृक्षारोपण के लिए श्रमदान किया।  

    एक दर्जन विभागों की समिति

    पिछले साल फरवरी-मार्च में पहली बार नदी की सांसें उखड़ने की खबर से शासन-प्रशासन सहित देश के पर्यावरणविद् और सामाजिक संगठन चिंतित हो उठे थे। कई महीने तक झिरी गांव में नदी के कैचमेंट एरिया में पानी रोकने स्टाप डैम और वृक्षारोपण भी किए गए। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास, जल संसाधन, पीएचई, इंडस्ट्री, आवास-पर्यावरण व नगरीय विकास सहित एक दर्जन विभागों की समिति गठित की गई।  

    विशेषज्ञ कर चुके दौरा

    पहली बार फरवरी-मार्च-2025 में नदी की सांसें उखड़ीं। शासन ने आर्ट ऑफ लिविंग संस्था से नदी बचाने का करार किया। संस्था के सोशल प्रोजेक्ट के डायरेक्टर, विशेषज्ञ, जियोलॉजिस्ट और हाइड्रोलॉजिस्ट कई बार दौरा कर चुके लेकिन अब तक  ‘बेतवा रिवाइवल प्रोजेक्ट’ जमीन पर शुरू नहीं हो पाया। 

    जिम्मेदार यह बोले.. 

    डीपीआर तैयार, काम  जल्दी शुरू होगा

    बेतवा रिवाइवल प्रोजेक्ट की डीपीआर बन चुकी है। जल्दी ही काम शुरू होगा। इस पवित्र नदी को बचाने के लिए शासन ने एमओयू किया है। संस्था के विशेषज्ञ प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं।  

    प्रहलाद पटेल, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री

    भूजल स्तर गिरना मुख्य वजह

    उद्गम स्थल पर नदी के सूखने की मूल वजह कैचमेंट एरिया का भूजल स्तर का गिरना है। ग्राउंड वाटर लेवल बढ़ाने वृक्षारोपण, स्टापडैम और अन्य ट्रीटमेंट प्लान पर काम करना होगा।

    जितेंद्र जैन, सीनियर हाइड्रोलॉजिस्ट, भोपाल

    प्रारंभिक प्लान प्रस्तुत

    बेतवा नदी को पुनर्जीवित करने को लेकर एनजीओ ने प्रारंभिक प्लान शासन के समक्ष प्रस्तुत कर दिया है। इस पर क्रियान्वयन और आगे की कार्रवाई चल रही है।

    अवि प्रसाद, सीईओ, मनरेगा मप्र

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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