इंदौर में साइबर ठगों ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर एक बुजुर्ग को जाल में फंसाने की कोशिश की, लेकिन समय रहते शक होने पर पीड़ित ने कॉल काटकर खुद को ठगी का शिकार होने से बचा लिया। आरोपी खुद को ATS अधिकारी बताकर आतंकी गतिविधियों में फंसाने और कोर्ट से वारंट जारी होने की धमकी दे रहे थे।
व्यंकटेश नगर (एक्सटेंशन) निवासी राजेंद्र कुमार माहेश्वरी को बुधवार को एक अनजान नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को ATS अफसर बताते हुए कहा कि उनके नाम से जारी सिम कार्ड का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों में हुआ है। इसके बाद उन्हें बॉम्बे हाईकोर्ट से गिरफ्तारी वारंट जारी होने की धमकी दी गई और करीब 45 मिनट तक मानसिक दबाव बनाकर पूछताछ की गई।
इसके बाद ठगों ने उन्हें व्हाट्सएप कॉल पर एक अन्य व्यक्ति से जोड़ा, जो पुलिस की वर्दी में नजर आ रहा था। उसने करीब 13 मिनट तक खुद को वरिष्ठ अधिकारी बताकर पूछताछ की और पीड़ित को डराने की कोशिश की। इस दौरान उनसे नकदी और संपत्ति से जुड़ी जानकारी लेने का प्रयास किया गया, ताकि ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर ठगी की जा सके।
हालांकि, बातचीत के दौरान राजेंद्र को शक हो गया और उन्होंने तुरंत कॉल काट दिया। उनकी सतर्कता से बड़ी साइबर ठगी टल गई। पीड़ित ने मामले की शिकायत जोन-1 डीसीपी कृष्ण लालचंदानी को दी है। पुलिस अब उन मोबाइल नंबरों और कॉल रिकॉर्ड्स की जांच कर रही है, जिनके जरिए यह फर्जीवाड़ा किया गया।