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अन्ना हजारे का बड़ा ऐलान!RTI नियमों पर महाराष्ट्र सरकार को अल्टीमेटम, बदलाव वापस नहीं लेने पर 5 जुलाई से करेंगे अनशन

सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने महाराष्ट्र सरकार को चेतावनी दी है कि, अगर RTI नियमों में किए गए संशोधन वापस नहीं लिए गए तो वह 5 जुलाई से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करेंगे। जानिए नए RTI नियमों पर उनकी आपत्ति, सरकार को लिखे पत्र की पूरी बात और किन बदलावों का हो रहा है विरोध।
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RTI नियमों पर महाराष्ट्र सरकार को अल्टीमेटम, बदलाव वापस नहीं लेने पर 5 जुलाई से करेंगे अनशन

मुंबई। सूचना के अधिकार (RTI) को लेकर एक बार फिर देश में बड़ा आंदोलन खड़ा हो सकता है। भ्रष्टाचार के खिलाफ कई ऐतिहासिक आंदोलनों का नेतृत्व कर चुके सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने महाराष्ट्र सरकार को सीधी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि यदि RTI नियमों में किए गए नए बदलाव वापस नहीं लिए गए तो वह 5 जुलाई से अपने गांव रालेगण सिद्धि में आमरण अनशन शुरू करेंगे। अन्ना का आरोप है कि नए नियम पारदर्शिता को कमजोर करेंगे और आम लोगों के सूचना पाने के अधिकार को सीमित कर देंगे।

क्या है पूरा मामला?

अन्ना हजारे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर महाराष्ट्र सरकार के 'महाराष्ट्र सूचना का अधिकार नियम, 2026' पर कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि, 12 जून को लागू किए गए नए नियम सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की मूल भावना के खिलाफ हैं। उनके मुताबिक, इन बदलावों से नागरिकों के लिए सरकारी जानकारी हासिल करना पहले की तुलना में अधिक कठिन और महंगा हो जाएगा।

5 जुलाई से अनिश्चितकालीन अनशन की चेतावनी

अपने पत्र में अन्ना हजारे ने साफ कहा है कि, अगर सरकार नए RTI नियमों को तुरंत वापस नहीं लेती, तो वह 5 जुलाई से अहिल्यानगर (पूर्व अहमदनगर) जिले के रालेगण सिद्धि स्थित यादव बाबा मंदिर में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वह अपने फैसले से पीछे नहीं हटेंगे, चाहे इसके लिए उन्हें अपनी जान की बाजी ही क्यों न लगानी पड़े।

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RTI आवेदन फीस बढ़ाने पर क्यों नाराज हैं अन्ना?

अन्ना हजारे ने RTI आवेदन शुल्क बढ़ाने का सबसे ज्यादा विरोध किया है। उनका कहना है कि सरकार ने फीस बढ़ाने के पीछे कोई ठोस आर्थिक कारण या वित्तीय विश्लेषण पेश नहीं किया है। उन्होंने कहा कि सूचना का अधिकार कानून सरकार के लिए कमाई का जरिया नहीं, बल्कि नागरिकों को जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने वाला कानून है। उनका मानना है कि, अगर 20 साल बाद आवेदन शुल्क बढ़ाया जा रहा है, तो सूचना देने में लापरवाही या इनकार करने वाले अधिकारियों पर लगने वाला जुर्माना भी बढ़ाया जाना चाहिए।

पहचान पत्र अनिवार्य करने पर भी जताई आपत्ति

नए नियमों के तहत RTI आवेदन के साथ पहचान पत्र देना अनिवार्य किया गया है। अन्ना हजारे ने इस प्रावधान का भी विरोध किया है। उनका कहना है कि RTI अधिनियम की धारा 6(2) के अनुसार किसी भी आवेदक को अपनी व्यक्तिगत जानकारी या सूचना मांगने का कारण बताने की आवश्यकता नहीं होती। ऐसे में पहचान पत्र अनिवार्य करना व्हिसलब्लोअर, सामाजिक कार्यकर्ताओं और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है।

'एक विषय, एक आवेदन' नियम पर भी उठाए सवाल

अन्ना हजारे ने सरकार के 'एक विषय, एक आवेदन' नियम को भी अव्यावहारिक बताया है। उनके अनुसार, इससे नागरिकों को एक ही विभाग से जुड़ी अलग-अलग जानकारियों के लिए कई आवेदन करने पड़ेंगे। इससे न केवल प्रक्रिया जटिल होगी, बल्कि लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी पड़ेगा। उनका कहना है कि इससे पारदर्शिता बढ़ने के बजाय सूचना प्राप्त करना और मुश्किल हो जाएगा।

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इन नए नियमों का भी किया विरोध

अन्ना हजारे ने कई अन्य नए प्रावधानों पर भी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि आवेदक के अनुपस्थित रहने पर अपील खारिज करना, आवेदक की मृत्यु होने पर मामला खुद ही समाप्त कर देना, सूचना आयोग में सुनवाई के दौरान कानूनी सहायता पर रोक लगाना और बार-बार आवेदन करने वालों पर प्रतिबंध जैसी व्यवस्थाएं नागरिकों के अधिकारों को कमजोर करेंगी। उनका कहना है कि सरकार को प्रक्रिया आसान बनानी चाहिए, न कि उसे अधिक तकनीकी और जटिल।

सरकार को क्या सलाह दी?

अन्ना हजारे का कहना है कि सरकार को RTI कानून की धारा 4 का प्रभावी पालन करना चाहिए। इस धारा के तहत सरकारी विभागों को अधिक से अधिक जानकारी स्वयं सार्वजनिक करनी चाहिए, ताकि लोगों को बार-बार RTI आवेदन दाखिल करने की जरूरत ही न पड़े। उनके अनुसार, इससे पारदर्शिता भी बढ़ेगी और सरकारी विभागों पर अनावश्यक बोझ भी कम होगा।

अन्ना हजारे की प्रमुख आपत्तियां

मुद्दा

अन्ना हजारे की आपत्ति

RTI आवेदन फीस

बिना ठोस कारण फीस बढ़ाना गलत

पहचान पत्र अनिवार्य

व्हिसलब्लोअर और एक्टिविस्ट की सुरक्षा पर खतरा

एक विषय, एक आवेदन

नागरिकों पर अतिरिक्त बोझ

अनुपस्थिति में अपील खारिज

प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के खिलाफ

आवेदक की मौत पर केस बंद

सूचना का अधिकार प्रभावित होगा

कानूनी सहायता पर रोक

न्याय पाने में कठिनाई बढ़ेगी

Manisha Dhanwani
By Manisha Dhanwani

मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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