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Peoples Update Special :मर्जी से जीने की चाह में घर से तीसरी बार निकला 11 साल का बच्चा

नर्मदापुरम जिले का एक 11 वर्षीय बालक अपनी मर्जी से जीवन जीने के लिए तीन बार घर से भाग चुका है। उसका कहना है कि मेरा नाम हीरो जैसा तो हीरो जैसी जिंदगी जीना चाहता हूं। चाइल्डलाइन ने उसे रेस्क्यू कर घरवालों को सौंपा है।
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मर्जी से जीने की चाह में घर से तीसरी बार निकला 11 साल का बच्चा
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    पल्लवी वाघेला,भोपाल। मम्मी-पापा ने मेरा नाम हीरो के नाम पर रखा है तो आखिर मैं हीरो जैसी स्टाइल में जिंदगी क्यों न जीऊं? वैसे भी पैसे कमाना उतना भी मुश्किल नहीं है। बस सलाम ठोकना है, अपनी आवाज में शकर डालकर बात करनी है तो खाने-पीने से लेकर 50-100 रुपए का इंतजाम तो यूं ही हो जाता है। जब मैं हीरो स्टाइल में अपने हिसाब से जी सकता हूं तो फिर घरवालों की रोक-टोक क्यों सुनूं। यह बातें काउंसलिंग के दौरान 11 साल के बच्चे ने चाइल्ड हेल्पलाइन द्वारा रेस्क्यू किए जाने पर कही। बच्चे को नर्मदापुरम जिले में उसके परिवार को सौंप दिया गया है।

    ढाई महीने से भोपाल के बोट क्लब पर था

    यह 11 साल का बच्चा पिछले ढाई महीने से अधिक समय से भोपाल में रह रहा था और बोट क्लब उसका फेवरेट स्पॉट था। बच्चे को लगातार यहां देख एक नागरिक ने हेल्पलाइन पर कॉल किया। इसके बाद बच्चे को रेस्क्यू किया गया। पहले बच्चा खुद को अनाथ बताता रहा, लेकिन जब उसे शेल्टर होम भेजने की बात की गई तो उसने तुरंत माता-पिता का मोबाइल नंबर बता दिया।  

    माता-पिता ने नहीं की थी शिकायत

    माता-पिता से संपर्क होने पर जानकारी लगी कि वह तीसरी बार घर से निकला है। मजदूर माता-पिता भी इतने परेशान हो गए हैं कि इस बार उन्होंने पुलिस में शिकायत नहीं की। उन्होंने बताया कि इसके पहले भी बच्चा खुद ही घर लौट आया था। उसे रोक-टोक पसंद नहीं है। जब मन करता है, घर से चला जाता है और फिर लौट भी आता है। 

    पास मिली डायरी में 250 फोन नंबर

    जानकारी के अनुसार बच्चे ने बोट क्लब और श्यामला हिल्स क्षेत्र में रहते हुए कई लोगों से दोस्ती कर ली थी। वह आने वाले लोगों खासकर युवाओं से खूब बात करता था और उन्हीं के नंबर उसके पास मौजूद डायरी में मिले हैं। इनमें से कुछ ने उसे कपड़े दिए थे। किसी ने पसंद के गॉग्ल्स, तो किसी ने अपने जूते। बच्चे के झोले में सनस्क्रीन, मॉइश्चराइजर और अन्य स्किन प्रोडक्ट भी मिले।

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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