Naresh Bhagoria
14 Jan 2026
पल्लवी वाघेला,भोपाल। मम्मी-पापा ने मेरा नाम हीरो के नाम पर रखा है तो आखिर मैं हीरो जैसी स्टाइल में जिंदगी क्यों न जीऊं? वैसे भी पैसे कमाना उतना भी मुश्किल नहीं है। बस सलाम ठोकना है, अपनी आवाज में शकर डालकर बात करनी है तो खाने-पीने से लेकर 50-100 रुपए का इंतजाम तो यूं ही हो जाता है। जब मैं हीरो स्टाइल में अपने हिसाब से जी सकता हूं तो फिर घरवालों की रोक-टोक क्यों सुनूं। यह बातें काउंसलिंग के दौरान 11 साल के बच्चे ने चाइल्ड हेल्पलाइन द्वारा रेस्क्यू किए जाने पर कही। बच्चे को नर्मदापुरम जिले में उसके परिवार को सौंप दिया गया है।
यह 11 साल का बच्चा पिछले ढाई महीने से अधिक समय से भोपाल में रह रहा था और बोट क्लब उसका फेवरेट स्पॉट था। बच्चे को लगातार यहां देख एक नागरिक ने हेल्पलाइन पर कॉल किया। इसके बाद बच्चे को रेस्क्यू किया गया। पहले बच्चा खुद को अनाथ बताता रहा, लेकिन जब उसे शेल्टर होम भेजने की बात की गई तो उसने तुरंत माता-पिता का मोबाइल नंबर बता दिया।
माता-पिता से संपर्क होने पर जानकारी लगी कि वह तीसरी बार घर से निकला है। मजदूर माता-पिता भी इतने परेशान हो गए हैं कि इस बार उन्होंने पुलिस में शिकायत नहीं की। उन्होंने बताया कि इसके पहले भी बच्चा खुद ही घर लौट आया था। उसे रोक-टोक पसंद नहीं है। जब मन करता है, घर से चला जाता है और फिर लौट भी आता है।
जानकारी के अनुसार बच्चे ने बोट क्लब और श्यामला हिल्स क्षेत्र में रहते हुए कई लोगों से दोस्ती कर ली थी। वह आने वाले लोगों खासकर युवाओं से खूब बात करता था और उन्हीं के नंबर उसके पास मौजूद डायरी में मिले हैं। इनमें से कुछ ने उसे कपड़े दिए थे। किसी ने पसंद के गॉग्ल्स, तो किसी ने अपने जूते। बच्चे के झोले में सनस्क्रीन, मॉइश्चराइजर और अन्य स्किन प्रोडक्ट भी मिले।