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Adi Shankaracharya Jayanti 2026 :जब बिखर रहा था धर्म, तब शंकराचार्य ने जोड़ा भारत; जानें चारों दिशाओं में क्यों की मठों की स्थापना

आदि शंकराचार्य जयंती 2026 पर जानिए महान संत और दार्शनिक की प्रेरक कहानी। उन्होंने अद्वैत वेदांत के जरिए सनातन धर्म को नई दिशा दी और देश के चारों कोनों में मठ स्थापित कर धार्मिक एकता को मजबूत किया। पढ़ें उनके जीवन, विचार और चार धाम स्थापना के पीछे का उद्देश्य विस्तार से।
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जब बिखर रहा था धर्म, तब शंकराचार्य ने जोड़ा भारत; जानें चारों दिशाओं में क्यों की मठों की स्थापना

सनातन धर्म में आदि शंकराचार्य का स्थान बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। वे केवल एक संत ही नहीं, बल्कि महान दार्शनिक और धर्म सुधारक भी थे। साल 2026 में शंकराचार्य जयंती 21 अप्रैल को मनाई जाएगी। इस दिन उनकी 1238वीं जयंती होगी। कहा जाता है कि जब हिन्दू संस्कृति कमजोर पड़ रही थी, तब उन्होंने उसे नई दिशा और मजबूती दी। उन्होंने अद्वैत वेदांत का प्रचार-प्रसार कर लोगों को एकता और सत्य का संदेश दिया।

कौन थे आदि शंकराचार्य?

आदि शंकराचार्य 8वीं शताब्दी के महान दार्शनिक थे। उनका जन्म केरल के कालड़ी गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम शिवगुरु और माता का नाम आर्याम्बा था। बचपन से ही वे बहुत तेज बुद्धि के थे। कहा जाता है कि उन्होंने मात्र 8 साल की उम्र में वेदों का ज्ञान प्राप्त कर लिया था। छोटी उम्र में ही उन्होंने संन्यास ले लिया और सत्य व ज्ञान की खोज में निकल पड़े। अपने जीवन में उन्होंने पूरे भारत का भ्रमण किया और लोगों को सही धर्म और ज्ञान का मार्ग दिखाया।

मठों की स्थापना क्यों की गई

उस समय समाज में कई तरह के मतभेद और भ्रम फैले हुए थे। लोग अलग-अलग विचारों में बंट गए थे और वेदों की सही शिक्षा भी लोगों तक नहीं पहुंच रही थी। इन समस्याओं को दूर करने के लिए आदि शंकराचार्य ने भारत के चारों दिशाओं में मठों (पीठों) की स्थापना की। उनका उद्देश्य केवल धार्मिक केंद्र बनाना नहीं था, बल्कि सनातन धर्म को संगठित करना और ज्ञान का प्रसार करना भी था।

चार प्रमुख मठ

आदि शंकराचार्य ने देश के चार कोनों में चार प्रमुख मठ स्थापित किए-

  • श्रृंगेरी मठ (दक्षिण - कर्नाटक)
  • द्वारका मठ (पश्चिम - गुजरात)
  • पुरी मठ (पूर्व - ओडिशा)
  • ज्योतिर्मठ (उत्तर - बद्रीनाथ, उत्तराखंड)

इन मठों के माध्यम से उन्होंने धर्म, शिक्षा और आध्यात्मिकता को पूरे भारत में फैलाया। आज भी ये मठ सनातन परंपरा के महत्वपूर्ण केंद्र माने जाते हैं।

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आदि शंकराचार्य के प्रमुख विचार

आदि शंकराचार्य ने अपने विचारों और श्लोकों के माध्यम से जीवन का गहरा ज्ञान दिया। उनके कुछ प्रमुख विचार आज भी लोगों को सही रास्ता दिखाते हैं-

'रह्म सत्यं जगन्मिथ्या जीवो ब्रह्मैव नापरः'
इसका अर्थ है कि केवल ब्रह्म (ईश्वर) ही सत्य है, यह संसार अस्थायी है और आत्मा व ब्रह्म अलग नहीं हैं।

'भज गोविन्दं भज गोविन्दं...'
इस श्लोक में उन्होंने बताया कि केवल ज्ञान या विद्या ही काफी नहीं है। जीवन में भक्ति और ईश्वर से जुड़ाव भी उतना ही जरूरी है।

आदि शंकराचार्य के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने पहले थे। उन्होंने लोगों को एकता, सच्चाई और आत्मज्ञान का रास्ता दिखाया। उनकी शिक्षाएं हमें यह सिखाती हैं कि जीवन में केवल भौतिक चीजें ही महत्वपूर्ण नहीं हैं, बल्कि आध्यात्मिकता और ईश्वर से जुड़ाव भी जरूरी है। यही कारण है कि आज भी उनकी जयंती पूरे श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई जाती है।

Shivani Gupta
By Shivani Gupta

शिवानी गुप्ता | MCU, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में ग्रेजुएशन | 9 वर्षों की टीवी और डिजिटल तक की य...Read More

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