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गांव में रिस्पॉन्स नहीं मिला, तो भोपाल आकर लगाया हर्बल गुलाल का स्टॉल, 5 दिन में 5 क्विंटल बिक गया

छिंदवाड़ा की ग्रामीण महिलाएं फूलों से बना रहीं रंग-गुलाल
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गांव में रिस्पॉन्स नहीं मिला, तो भोपाल आकर लगाया हर्बल गुलाल का स्टॉल, 5 दिन में 5 क्विंटल बिक गया

भोपाल। छिंदवाड़ा जिले के ग्राम पिंडरई की पूजा मौर्य ने दसवीं कक्षा की पढ़ाई करते हुए गांव में ही प्राकृतिक फूलों से हर्बल रंग और गुलाल बनाना प्रारंभ किया। शुरुआत में मार्केट नहीं मिला लेकिन भोपाल आकर विंध्याचल भवन सहित आधा दर्जन स्थानों पर स्टॉल लगाए। यहां कर्मचारियों और अधिकारियों से ऐसा मार्केट मिला कि 5 दिन में पांच क्विंटल गुलाल बिक गया। इससे उन्हें 5 हजार रु. तक की आय हो जाती है। नवाचार के तहत पूजा के साथ गांव की 160 महिलाएं फूलों से रंग, गुलाल और अन्य सामग्रियां तैयार करती हैं। दीनदयाल अंत्योदय महिला बहुउद्देश्यीय सहकारी समिति मर्यादित पिंडरई के प्रबंधक राजेन्द्र कुमार शर्मा बताते हैं कि वर्ष 2018 में पहली बार 25 किलो का रंग और गुलाल बनाया, लेकिन रिजल्ट नहीं मिला था पर अब अच्छा रिस्पॉन्स है।

भोपाल के लोगों को पसंद आया प्राकृतिक गुलाल

शर्मा बताते हैं कि छिंदवाड़ा कलेक्टर कार्यालय में स्टॉल लगाकर रंग- गुलाल बेच रहे थे। सहकारिता विभाग के अफसर तुमुल सिन्हा ने भोपाल में स्टाल लगाने कहा। यहां 10 रु में 1 किलो केमिकल नहीं, 40 रु में 50 ग्राम फूलों का गुलाल पसंद आया।

अन्य प्रोडक्ट्स भी बना रहीं समिति की सदस्य

समिति के जरिए माहुल के पत्ते के दोने, छत्तेवाले मशरूम प्रोटीन पाउडर, महुए के लड्डू, फूल झाडू, आंवला की कैंडी बनाई जा रही हैं। हर्बल रंग-गुलाल व अन्य सामग्रियों की बिक्री से प्रति सदस्य 3,200 रुपए तक आय होने लगी है।

विभाग ने नवाचार पर विशेष जोर दिया है। इसके तहत ही सहकारी समितियों को इस ओर प्रेरित किया जा रहा है। संस्था हर्बल गुलाल और रंग बनाकर ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से संपन्न बना रही है। बड़े शहरों में बाजार दिलाने के लिए प्रेरित किया गया है। - तुमुल सिन्हा, नवाचार प्रकोष्ठ प्रभारी, सहकारिता विभाग्

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