
वॉशिंगटन। दुनिया भर में मच्छर मलेरिया, डेंगू और जीका वायरस जैसी बीमारियों को फैलाने के लिए कुख्यात हैं। इनसे बचने के लिए पारंपरिक रूप से डाइएथिलटोल्यूएमाइड जैसे कैमिकल्स का इस्तेमाल किया जाता रहा है। लेकिन अब मच्छरों से बचने के बड़े उपाय के रूप में माइक्रोबायोलॉजिस्ट लंबे समय तक चलने वाला और गैर-विषाक्त तरीका खोज सकते हैं। शोधकर्ताओं ने मानव की चमड़ी के एक बैक्टीरिया में बदलाव कर उसे ऐसे तैयार किया है कि वो मच्छरों तो दूर भगा सकता हैं। इस जेनेटिक इंजीनियरिंग के काफी अच्छे रिजल्ट आ रहे हैं। मच्छर भगाने का यह तरीका हमारी पारंपरिक सोच से काफी अलग है।
बैक्टीरिया भी खींचते हैं मच्छरों को हमारी तरफ
मच्छर (खास तौर पर मादा मच्छर) मानव और जानवरों के शरीर द्वारा उत्पन्न महक से आकर्षित होते हैं। इनको मानवों की तरफ खींचने में कार्बन डाइआॅक्साइड, गर्मी और माइक्रोब्स द्वारा निकाली गई महक का अहम रोल है। इनमें भी कुछ बैक्टीरिया द्वारा रिलीज किया गया लैक्टिक एसिड भी शामिल है। इनमें स्टेफायलोकस एपिडर्मिस और कॉर्निनेबैक्टीरियम एमीकोलेटम दो ऐसे बैक्टीरिया हैं जो मच्छरों को मानवों की तरफ खींचने का कारण बनते हैं।
जानें क्या किScientists या वैज्ञानिकों ने
कैलिफोर्निया और सेन डियागो यूनिवर्सिटी के रिसर्चस ने इन बैक्टीरिया में बदलाव कर उन्हें ऐसा कर दिया है जिससे वो कम लैक्टिक एसिड तैयार करें। टीम जिसे उमर अकबरी लीड कर रहे हैं, उसका आइडिया था कि ऐसे बैक्टीरिया तैयार करें जिन्हें स्किन पर लगाने के बाद कम मच्छर हमारी तरफ आकिर्षित हों। टीम ने इन जेनेटिकली मॉडिफाइड बैक्टीरिया को चूहों पर टेस्ट भी किया। एक्सपेरिमेंट में लिए गए चूहों पर प्राकृतिक बैक्टीरिया और जेनेटिकली इंजीनियर्ड बैक्टीरिया को पेंट किया गया और फिर मच्छरों को बीच छोड़ दिया। रिसर्चर्स ने कहा कि इस एक्सपेरिमेंट के परिणाम काफी चमत्कारी थे। इंजीनियर्ड बैक्टीरिया वाले चूहों की तरफ करीब 50 प्रतिशत कम मच्छर आकर्षित हुए। एक्सपेरिमेंट में यह भी सामने आया कि इंजीनियर्ड बैक्टीरिया का असर चूहों पर 11 दिन तक दिखा।