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नाटक ‘चौथी सिगरेट’ में दिखाई लेखक की मन:स्थिति, टिकट के बाद भी सीटें फुल

भारत भवन में चार साल बाद शुरू हुआ रंगोत्सव, पहले दिन राजीव वर्मा के निर्देशन में हुई प्रस्तुति
नाटक ‘चौथी सिगरेट’ में दिखाई लेखक की मन:स्थिति, टिकट के बाद भी सीटें फुल

भारत भवन में लंबे समय बाद कोई सांस्कृतिक प्रस्तुति का आयोजन हुआ। इससे पहले स्थापना दिवस समारोह और बाल फिल्म प्रदर्शन का आयोजन किया गया था। शुक्रवार को यहां चार साल बाद मप्र रंगोत्सव की शुरुआत हुई, जिसमें 28 जुलाई तक नाटकों के मंचन होंगे। पहले दिन जाने-माने रंगकर्मी राजीव वर्मा के निर्देशन में नाटक चौथी सिगरेट का मंचन किया गया, जिसका लेखन योगेश त्रिपाठी रहा। नाटक को देखने के लिए बड़ी संख्या में दर्शक पहुंचे। इस नाटक को साल 2019 में मोहन राकेश अवॉर्ड भी मिल चुका है। नाटक में लेखक को गरीब दिखाया गया है। इसकी वजह से लेखक गरीबी के कारण सिगरेट को तीन बार बस स्मेल कर के मन भर लेता था और चौथी बार में उसे पीता है। इसलिए इसका शीर्षक चौथी सिगरेट रखा गया। लेखक की इच्छा होती है कि उसका लिखा हुआ पढ़ा जाए, लोग उस पर चर्चा करें, उसके विचारों को जानें लेकिन लेखन को पाठक तक पहुंचने से पहले एक सिस्टम से गुजरना होता है, जिसके कारण श्रेष्ठ रचनाएं पाठक तक नहीं पहुंच पातीं। मंच पर राजीव वर्मा, रीता वर्मा, प्रवीण महूवाले, महुआ चटर्जी, सुनील सक्सेना और सिमरन बहल ने अभिनय किया।

नाटक में बिजनेसमैन दोस्त लाता है ट्विस्ट

नाटक में दिखाया गया कि गरीब लेखक है और उसका एक अमीर दोस्त है, जिसे फेमस होने का शौक है। एक दिन वो अपने दोस्त के पास जाता है और कहता है कि तुम्हारी रचनाएं तो वैसे भी कोई नहीं पढ़ता, ऐसा करो तुम वे रचनाएं मुझे दे दो। उसका दोस्त उसकी रचनाएं छाप कर फेमस हो जाता है। लेखक भी पैसे पाकर संतुष्ट हो जाता है। कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब बिजनेसमैन कहता है कि मैं दुनिया को बता दूंगा कि सारी रचनाएं तुम्हारी हैं। लेखक गुस्सा हो जाता है और कहता है कि तुम ऐसा नहीं करो मैं गरीबी नहीं देख सकता हूं।

भोपाल में चौथी बार हुआ इस नाटक का मंचन

अभी तक नाटक के कुल 5 शो हो चुके हैं और यह छठवां शो हैं। भोपाल में इस नाटक का यह चौथा शो था। सेट पर एक तरफ लेखक की टेबल रखी होती हैं, वहीं दूसरी ओर लेखक के अमीर दोस्त के घर का सेट लगाया गया था। - राजीव वर्मा, निर्देशक

हंसी भरे अंदाज में दिए जीवन के लिए कई अहम संदेश

प्रस्तुति में लेखक के जीवन में हो रही रस्साकसी को बड़े ही सधे हुए ढंग से प्रस्तुत किया। संवादों में एक तरफ जीवन के लिए कई महत्वपूर्ण संदेश थे, तो दूसरी तरफ दर्शकों के लिए हल्के-फुल्के हंसी के पल थे। - आशुतोष मिश्रा, दर्शक

People's Reporter
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