Silver Import:केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, अब बिना मंजूरी नहीं होगा चांदी का इंपोर्ट

नई दिल्ली।
केंद्र सरकार ने चांदी (Silver) के इंपोर्ट को लेकर बड़ा फैसला लिया है। अब विदेश से चांदी मंगाना पहले जैसा आसान नहीं रहेगा। सरकार ने चांदी को ‘फ्री कैटेगरी’ से हटाकर ‘रिस्ट्रिक्टेड कैटेगरी’ में डाल दिया है। इसका मतलब है कि अब कोई भी व्यापारी या कंपनी बिना सरकारी मंजूरी के चांदी का इम्पोर्ट नहीं कर सकेगी।
सरकार के इस फैसले के बाद चांदी इंपोर्ट करने के लिए लाइसेंस या विशेष अनुमति लेना जरूरी होगा। यह नियम शनिवार से लागू कर दिया गया है। माना जा रहा है कि सरकार ने यह कदम फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व पर बढ़ते दबाव और लगातार बढ़ रहे इम्पोर्ट को देखते हुए उठाया है।
आखिर सरकार ने क्यों लिया ये बड़ा फैसला?
पिछले कुछ महीनों में भारत में चांदी के इम्पोर्ट में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। खासतौर पर अप्रैल 2026 में सिल्वर इंपोर्ट में रिकॉर्ड उछाल देखने को मिला। सरकार को चिंता है कि सोना और चांदी जैसी चीजों के भारी इम्पोर्ट से देश का फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व प्रभावित हो सकता है।
इसी वजह से सरकार अब गैर-जरूरी इम्पोर्ट पर नियंत्रण करना चाहती है। ऊर्जा, पेट्रोलियम और उर्वरक जैसी जरूरी चीजों के लिए विदेशी मुद्रा बचाने पर फोकस किया जा रहा है। यही कारण है कि अब चांदी के इम्पोर्ट को नियंत्रित करने का फैसला लिया गया है।
अप्रैल में 157 फीसदी बढ़ गया चांदी का इम्पोर्ट
सरकारी आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2026 में चांदी का इम्पोर्ट पिछले साल की तुलना में करीब 157 फीसदी बढ़ गया। पिछले साल अप्रैल 2025 में जहां चांदी का इम्पोर्ट 159.85 मिलियन डॉलर था, वहीं इस साल अप्रैल 2026 में यह बढ़कर 411.06 मिलियन डॉलर पहुंच गया।
भारतीय रुपए में देखें तो अप्रैल 2026 में चांदी का इम्पोर्ट 3,845 करोड़ रुपये से ज्यादा का रहा। जबकि पिछले साल इसी महीने में यह आंकड़ा करीब 1,367 करोड़ रुपये था। यानी सिर्फ एक साल में चांदी का इम्पोर्ट कई गुना बढ़ गया।
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सोने और चांदी पर पहले ही बढ़ चुकी है इंपोर्ट ड्यूटी
सरकार ने कुछ समय पहले ही सोने और चांदी पर इम्पोर्ट शुल्क बढ़ाया था। पहले इन पर 6 फीसदी ड्यूटी लगती थी, जिसे बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया गया। सरकार का उद्देश्य था कि लोग कम मात्रा में सोना-चांदी इम्पोर्ट करें और फॉरेन करेंसी की बचत हो सके। लेकिन इसके बावजूद चांदी के इम्पोर्ट में लगातार तेजी बनी रही। अब सरकार ने एक कदम आगे बढ़ाते हुए इंपोर्ट के लिए लाइसेंस अनिवार्य कर दिया है।
क्या होता है ‘रिस्ट्रिक्टेड कैटेगरी’?
जब कोई वस्तु ‘फ्री कैटेगरी’ में होती है तो उसे विदेश से इम्पोर्ट करने के लिए किसी खास अनुमति की जरूरत नहीं होती। व्यापारी सामान्य नियमों के तहत सामान मंगा सकते हैं, लेकिन अब चांदी को ‘रिस्ट्रिक्टेड कैटेगरी’ में डाल दिया गया है। इसका मतलब है कि अब चांदी का इम्पोर्ट करने से पहले सरकार से मंजूरी लेनी होगी। बिना लाइसेंस या अनुमति के कोई भी चांदी इंपोर्ट नहीं कर पाएगा।
कौन-कौन सी चांदी इस नियम में शामिल?
सरकार ने दो तरह के HS कोड के तहत आने वाली चांदी पर यह नियम लागू किया है। इसमें 99.9 फीसदी या उससे ज्यादा शुद्धता वाली सिल्वर बार और अन्य प्रकार की चांदी की छड़ें और बुलियन ग्रेड सिल्वर शामिल है।
फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व को लेकर सरकार सतर्क
भारत के पास इस समय 690 अरब डॉलर से ज्यादा का फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व है। यह करीब 10 महीनों के इम्पोर्ट को संभालने के लिए पर्याप्त माना जाता है। इसके बावजूद सरकार सतर्कता बरत रही है। हाल ही में सरकार की ओर से लोगों से गैर-जरूरी विदेश यात्राओं से बचने और एक साल तक सोना न खरीदने की अपील भी की गई थी।
चांदी का इम्पोर्ट सोने से भी तेजी से बढ़ा
वित्त वर्ष 2026 में भारत का सोने का इम्पोर्ट करीब 24 फीसदी बढ़कर 71.98 अरब डॉलर तक पहुंच गया। लेकिन चौंकाने वाली बात यह रही कि चांदी का इम्पोर्ट इससे भी ज्यादा तेजी से बढ़ा।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2026 में चांदी का इम्पोर्ट 149 फीसदी बढ़कर 12.05 अरब डॉलर हो गया। इससे साफ है कि बाजार में चांदी की मांग तेजी से बढ़ रही है।
मार्च 2026 में भी रिकॉर्ड इंपोर्ट
मार्च 2026 में भी चांदी के इम्पोर्ट में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई। मार्च 2025 में भारत ने 1,28,987 किलोग्राम चांदी इम्पोर्ट की थी। वहीं मार्च 2026 में यह आंकड़ा बढ़कर 2,47,008 किलोग्राम तक पहुंच गया। यानी सिर्फ एक साल में चांदी के इम्पोर्ट की मात्रा में करीब 91 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।
आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर?
सरकार के इस फैसले का असर आने वाले समय में चांदी की कीमतों पर दिखाई दे सकता है। क्योंकि अब इंपोर्ट के लिए मंजूरी और लाइसेंस की जरूरत होगी, जिससे सप्लाई प्रभावित हो सकती है। सरकार का मुख्य उद्देश्य विदेशी मुद्रा बचाना और गैर-जरूरी इम्पोर्ट पर नियंत्रण करना है। लगातार बढ़ते सोना और चांदी के इम्पोर्ट से देश के व्यापार घाटे पर असर पड़ता है।











