Shivani Gupta
3 Jan 2026
Garima Vishwakarma
24 Dec 2025
सकट चौथ भगवान गणेश को समर्पित एक विशेष व्रत है। इसे साल की सबसे बड़ी चतुर्थी भी कहा जाता है। यह व्रत माघ महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है। इस दिन माताएं अपनी संतान की सुख-समृद्धि, लंबी आयु, सफलता और सुरक्षा के लिए निर्जला व्रत करती हैं। सकट चौथ को तिलकुटा चौथ, माघी चौथ और वक्रतुंडी चतुर्थी भी कहा जाता है।
व्रत तिथि : मंगलवार, 6 जनवरी 2026
चतुर्थी तिथि प्रारंभ : 6 जनवरी सुबह 08:01 बजे
चतुर्थी तिथि समाप्त : 7 जनवरी सुबह 06:52 बजे
चंद्रोदय समय : रात 08:54 बजे
इस दिन भगवान गणेश की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है। संतान पर आने वाले संकट दूर होते हैं। मान्यता है कि सकट चौथ का व्रत पूरी श्रद्धा से करने पर भगवान गणेश माता-पिता की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।
पूजा के समय इन मंत्रों का जाप करें-
श्री वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटि समप्रभा।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्व कार्येषु सर्वदा॥
ॐ गणपतये नमः॥
ॐ वक्रतुण्डाय नमः॥
ॐ विकटाय नमः॥
एक गांव में दो भाभियां रहती थीं- एक अमीर और दूसरी गरीब। गरीब भाभी भगवान गणेश की सच्ची भक्त थी और सकट चौथ का व्रत करती थी। एक बार पूजा के दिन उसके पास भोजन तक नहीं था, फिर भी उसने श्रद्धा से व्रत रखा।
भगवान गणेश उसकी भक्ति से प्रसन्न हुए और उसके घर स्वयं आए। अगले दिन उसका घर धन और आभूषणों से भर गया।
दूसरी भाभी ने लालच में वही करने की कोशिश की, लेकिन उसे कुछ नहीं मिला। यह कथा सिखाती है कि भगवान गणेश सच्ची भक्ति से प्रसन्न होते हैं, लालच से नहीं।
सकट चौथ का व्रत श्रद्धा, विश्वास और नियम से किया जाए तो भगवान गणेश की विशेष कृपा प्राप्त होती है और संतान पर आने वाले सभी संकट दूर होते हैं।