
मुंबई। महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने पद छोड़ने की इच्छा जताई है। उन्होंने बताया – मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सभी राजनीतिक जिम्मेदारियां छोड़ने की इच्छा जताई है। कोशयारी ने कहा कि वह अपने जीवन का बाकी समय पढ़ने-लिखने समेत अन्य गतिविधियों में बिताना चाहेंगे।
बाकी जीवन पढ़ने-लिखने में बिताने की इच्छा
कोश्यारी ने ,एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया मुंबई दौरे के दौरान मैंने उनसे सभी राजनीतिक दायित्यों से मुक्त होने और बाकी जीवन पढ़ने-लिखने एवं अन्य गतिविधियों में बिताने की अपनी इच्छा से अवगत कराया। इस संबंध में राजभवन की ओर से भी बयान जारी किया गया है।
During the recent visit of the Hon'ble Prime Minister to Mumbai, I have conveyed to him my desire to be discharged of all political responsibilities and to spend the remainder of my life in reading, writing and other activities.
— Governor of Maharashtra (@maha_governor) January 23, 2023
19 जनवरी को पीएम के सामने जताई थी इच्छा
राजभवन के बयान के मुताबिक, राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री से उन्हें हमेशा प्यार और स्नेह मिला और वह उम्मीद करते हैं पद छोड़ने के संबंध में भी उन्हें वही स्नेह मिलेगा। प्रधानमंत्री 19 जनवरी 2023 को कई परियोजनाओं के शिलान्यास और उद्धाटन के लिए मुंबई पहुंचे थे। कोश्यारी ने इसी दिन प्रधानमंत्री को अपनी इच्छा के बारे में बताया था। कोश्यारी ने कहा- राज्य सेवक या राज्यपाल के रूप में संतों, समाज सुधारकों और बहादुर सेनानियों की धरती महाराष्ट्र जैसे महान राज्य की सेवा करना मेरे लिए पूर्ण सम्मान और सौभाग्य की बात है।
शिवाजी को पुराने जमाने का कहने पर हुआ था विवाद
कोश्यारी ने 19 नवंबर को औरंगाबाद में एक विश्वविद्यालय के कार्यक्रम के दौरान कोश्यारी का बयान विवादों के घेरे में आ गया था। दरअसल, कोश्यारी ने यहां शिवाजी को पुराने दिनों का आइकॉन बताया दिया था। उन्होंने सभा में बाबासाहेब अंबेडकर और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को नए जामने का आइकॉन बताया था। इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता नितिन गडकरी और एनसीपी चीफ शरद पवार भी मौजूद थे। इस बयान के बाद विपक्ष ने कड़ी आपत्ति उठाई थी और इस्तीफा मांगा था। शिंदे गुट ने भी कोश्यारी के बयान का विरोध किया था। इसके बाद कोश्यारी ने गृहमंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर पद छोड़ने के संबंध में मार्गदर्शन मांगा था।