Operation Amistad:वेनेजुएला में भारत ने शुरू किया तेज-हाई-टेक ऑपरेशन, 800 से अधिक मरीजों का सफल इलाज

24 जून 2026 को वेनेजुएला के उत्तरी हिस्से में दो बड़े भूकंप आए, जिनकी तीव्रता 7.2 और 7.5 रही। इन भूकंपों ने पूरे इलाके को हिला दिया। कई इमारतें गिर गईं, अस्पतालों पर दबाव बढ़ गया और बड़ी संख्या में लोग घायल हो गए। ऐसे समय में भारत ने तुरंत मदद के लिए कदम उठाया और ऑपरेशन अमीस्टाड शुरू किया। यह मिशन भारत के सबसे तेज और संगठित विदेश राहत अभियानों में से एक माना जा रहा है, जिसमें सेना, वायुसेना और मेडिकल टीम ने मिलकर काम किया।
राहत मिशन की तेज शुरुआत
भारत से 60 पैरा फील्ड हॉस्पिटल की 41 सदस्यीय मेडिकल टीम को तुरंत वेनेजुएला भेजा गया। उनके साथ भारतीय वायुसेना के दो C-17 ग्लोबमास्टर विमान भी रवाना हुए। इन विमानों में लगभग 66 टन राहत सामग्री भेजी गई, जिसमें आधुनिक मेडिकल उपकरण, दवाइयाँ और भारतीय तकनीक से बने BHISHM क्यूब पोर्टेबल फील्ड हॉस्पिटल मॉड्यूल शामिल थे।
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कराकस में अस्थायी अस्पताल की स्थापना
यह मेडिकल टीम वेनेज़ुएला की राजधानी कराकस में स्थित ला रिनाडा कॉम्प्लेक्स में तैनात की गई। यहां एक अस्थायी फील्ड हॉस्पिटल तैयार किया गया, जो लगातार 24×7 काम कर रहा है। इस अस्पताल ने कुछ ही दिनों में 800 से अधिक मरीजों का इलाज किया और लगभग 65 सफल ऑपरेशन किए। डॉक्टर और नर्सें लगातार घायलों को तुरंत इलाज देने में जुटी हैं।
आधुनिक कम्युनिकेशन सिस्टम की ताकत
इस पूरे राहत अभियान में एक उन्नत संचार प्रणाली भी लगाई गई है। एक विशेष सिग्नल डिटेचमेंट यूनिट को फील्ड हॉस्पिटल के साथ जोड़ा गया, जिससे डॉक्टर, सर्जन और सपोर्ट स्टाफ एक ही नेटवर्क पर जुड़े रहे। हर जानकारी तुरंत साझा की जा रही है, जिससे इलाज और फैसले तेजी से हो रहे हैं।
इसके साथ ही हाई बैंडविड्थ टेलीमेडिसिन सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है, जिससे भारत के विशेषज्ञ डॉक्टरों से सीधे सलाह ली जा सकती है। स्थानीय भाषा में अनुवाद सेवा और सीसीटीवी निगरानी भी इस सिस्टम का हिस्सा है।
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शत्रुजीत ब्रिगेड की तकनीकी भूमिका
इस मिशन में भारतीय सेना की शत्रुजीत ब्रिगेड कम्युनिकेशन टास्क फोर्स ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ड्रोन की मदद से सुरक्षित जगहों की पहचान की गई और तेज़ मैपिंग की गई। OneWeb सैटेलाइट इंटरनेट के जरिए खराब हो चुके नेटवर्क के बावजूद तेज़ कनेक्टिविटी बहाल की गई।
टैक्टिकल रेडियो सिस्टम ने सभी टीमों के बीच लगातार संपर्क बनाए रखा। इसके अलावा सुरक्षा निगरानी सिस्टम ने पूरे क्षेत्र पर नजर रखी ताकि मरीजों और टीम की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। टेलीमेडिसिन सुविधा के जरिए भारत के विशेषज्ञ डॉक्टरों से रियल टाइम सलाह ली गई।











