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अब हमीदिया अस्पताल में AI से बिना सर्जरी दूर होगा जबड़े का दर्द

अस्पताल में थ्रीडी प्रिंटर से तैयार हो रहे टीएमजे स्प्लिंट
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अब हमीदिया अस्पताल में AI से बिना सर्जरी दूर होगा जबड़े का दर्द
प्रवीण श्रीवास्तव /भोपाल। अगर आपको चबाने, हंसने यहां तक कि बात करने में भी निचले जबड़े में दर्द होता है तो आप टेम्पोरोमैंडिबुलर जॉइंट यानी टीएमजे डिसऑर्डर से पीड़ित हो सकते हैं। इस समस्या से निदान के लिए आमतौर पर दवाएं या जटिल सर्जरी ही विकल्प है। लेकिन गांधी मेडिकल कॉलेज के दंतरोग विभाग में इस डिसऑर्डर का उपचार अब आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) के माध्यम से किया जा रहा है। एआई एल्गोरिदम और थ्रीडी प्रिंटर के माध्यम से टीएमजे स्प्लिंट तैयार कर बिना दवा या सर्जरी के इस डिसऑर्डर को दूर किया जा रहा है। हमीदिया अस्पताल में फिलहाल इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया गया है। अब तक करीब एक दर्जन मरीजों में इस तकनीक का सफल इस्तेमाल किया जा चुका है। प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पहली बार है जब टीएमजे स्प्लिंट के लिए एआई तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। विभाग के मैक्सिलोफैशियन सर्जन डॉ. अनुज भार्गव बताते हैं कि टीएमजेडी एक सामान्य विकार है। करीब 25 फीसदी लोग किसी न किसी रूप में इससे पीड़ित होते हैं।

क्या है टेम्पोरोमैंडिबुलर जॉइंट

आमतौर पर टीएमजे निचले जबड़े (मैंडिबल) के पिछले हिस्से को कहा जाता है, जो जोड़ चेहरे के दोनों किनारों पर कानों के सामने स्थित होता है। यह जोड़ जबड़े को खोपड़ी से जोड़ते हैं। यही नहीं शरीर में सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले जोड़ों में से एक टेम्पोरोमैंडिबुलर जोड़ है। मुंह को खोलने, बंद करने से लेकर अन्य कामों के लिए यह जोड़ को प्रतिदिन 2000 से ज्यादा बार काम करता है। किसी चोट, बीमारी या अन्य कारणों से इस जोड़ की मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं, जिससे जोड़ के मूवमेंट के दौरान तकलीफ होने लगती है।

गर्दन या जबड़े की चोट से होता है विकार

विशेषज्ञों के मुताबिक यह डिसऑर्डर आमतौर पर जबड़े या गर्दन पर लगी चोट के कारण होता है। इसके अलावा गठिया, जबड़े के जोड़ों का घिसना और बार-बार दांत पीसने जैसी आदतों से भी डिसऑर्डर हो सकता है। कई बार देखा गया है कि यह जन्मजात विकृति के कारण भी होता है। शोध बताते हैं कि यह पुरुषों की तुलना में महिलाओं में ज्यादा आम है।

कैसे काम करता है एआई

चिकित्सकों के मुताबिक इसके लिए एआई के माध्यम से जबड़े की थ्रीडी इमेज ली जाती है। इसके लिए इंट्रा ओरल स्कैनर का उपयोग होता है। इस इमेज के बाद थ्रीडी तकनीक के माध्यम से टीएमजे स्प्लिंट तैयार की जाती है, जो जोड़ को मजबूती प्रदान करती है। इस स्प्लिंट को बीमारी की गंभीरता के अनुसार आठ सप्ताह से छह महीने तक पहनना होता है।

टीएमजे विकार के लक्षण

  •  चबाने, बात करने या जम्हाई लेने में कठिनाई या दर्द
  • सिर दर्द, गर्दन में दर्द
  • दांतों की जकड़न या पीसना
  • जबड़ा खोलते या बंद करते समय तेज दर्द
  • कान में दर्द या सीटी बजना (टेननाइटिस)
  • मुंह खोलने की सीमित क्षमता
थ्रीडी तकनीक से स्प्लिंट से टीएमजे डिसऑर्डर से जूझ रहे लोगों को खासा आराम मिलता है। इससे मरीजों को बिना सर्जरी के ही इस बीमारी से राहत मिलती है। अभी पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया गया है। - डॉ. अनुज भार्गव, एचओडी दंतरोग विभाग, जीएमसी
People's Reporter
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