Manisha Dhanwani
20 Jan 2026
मनीला। भारतीय एनजीओ ‘एजुकेट गर्ल्स' को प्रतिष्ठित रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया और इसने यह सम्मान उन हजारों क्षेत्रीय समन्वयकों, स्वयंसेवकों और युवा मार्गदर्शकों को समर्पित किया है, जिन्होंने दूरदराज के गांवों में स्कूल न जाने वाली लड़कियों की शिक्षा के लिए काम किया है। वर्ष 2007 में स्थापित, ‘एजुकेट गर्ल्स' उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश और बिहार के 30,000 से अधिक गांवों में गरीबी और निरक्षरता के चक्र को तोड़ने के लिए काम करती है। पचपन हजार से अधिक समुदाय-आधारित स्वयंसेवकों के समर्थन से यह एनजीओ 20 लाख से अधिक लड़कियों को स्कूल वापस लेकर लाया है और शिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से 24 लाख से अधिक बच्चों को सहायता प्रदान की है।
‘एजुकेट गर्ल्स' की स्थापना 2007 में ‘लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स' की स्नातक सफीना हुसैन ने की थी। पुरस्कार स्वीकार करते हुए सफीना हुसैन ने कहा, 'यह पुरस्कार हमारी लड़कियों के लिए है, जो अपने साहस और धैर्य से हमें प्रेरित करती हैं। वे लड़कियां जो घरेलू जिम्मेदारियों को संभालती हैं और अपने, अपने परिवार और अपने देश के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण के लिए देर रात तक पढ़ाई करती हैं।' उन्होंने कहा, 'इस सम्मान के माध्यम से, हम उन अभिभावकों, शिक्षकों, समुदाय के सदस्यों और टीम बालिका के 55,000 स्वयंसेवकों का सम्मान करते हैं जो हर दिन हमारी लड़कियों के साथ खड़े होते हैं। उनका समर्पण दर्शाता है कि जब समुदाय लड़कियों को शिक्षित करने के लिए एकजुट होते हैं, तो हर लड़की को अवसर, विकल्प, आवाज और स्वतंत्रता मिलती है।'
सीईओ गायत्री नायर लोबो ने कहा कि यह सम्मान लड़कियों को शिक्षित करने के एक उद्देश्य से एकजुट होकर एक साथ आने वाले लोगों की अद्भुत शक्ति की याद दिलाता है। उन्होंने कहा, 'यह हमारे सामूहिक प्रयासों, नवोन्मेषी कार्यक्रमों और सरकार की प्रभावशाली योजनाओं का सम्मान करता है। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि यह अगले लक्ष्य 2035 तक एक करोड़ शिक्षार्थियों तक पहुंचने की हमारी महत्वाकांक्षा को और मजबूत करता है। दुनियाभर में लाखों लड़कियां अभी भी सीखने के अपने मौके की प्रतीक्षा कर रही हैं और हम उन्हें और प्रतीक्षा नहीं कराने के लिए दृढ़ हैं।' सम्मान प्रदान करते हुए, रेमन मैग्सेसे पुरस्कार फाउंडेशन (RMAF) ने ‘एजुकेट गर्ल्स' की लड़कियों और युवतियों की शिक्षा के माध्यम से सांस्कृतिक रूढ़िवादिता को दूर करने, उन्हें निरक्षरता के बंधन से मुक्त करने तथा उन्हें अपनी पूर्ण मानवीय क्षमता प्राप्त करने के लिए कौशल और साहस प्रदान करने की प्रतिबद्धता का उल्लेख किया।