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मुस्लिम परिवार के पास है 310 साल पहले फारसी में लिखी रामायण

ग्वालियर : मुस्लिम परिवार का हर सदस्य पढ़ता है रामायण, अपने घर में आज जलाएंगे 11 दीये
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मुस्लिम परिवार के पास है 310 साल पहले फारसी में लिखी रामायण

आशीष शर्मा, ग्वालियर। अयोध्या में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम की प्रतिमा की प्राण- प्रतिष्ठा सोमवार को होने जा रही है। सनातनी और गैर सनातनी, जिनकी प्रभु राम में आस्था है, सभी जय श्रीराम के जयकारे लगाते हुए घरों पर भगवा पताका फहराने के पुण्य कार्य में लगे हुए हैं। जगह-जगह रामायण का पाठ हो रहा है। रामायण को लेकर शहर का एक मुस्लिम इस समय खासा चर्चाओं में है। परिवार के पास दुर्लभ रामायण है। दुर्लभ इसलिए कि यह 310 साल पहले फारसी भाषा में लिखी रामायण की प्रति है। परिवार भगवान राम की प्राण-प्रतिष्ठा पर रामायण के पास 11 दीये जलाएगा।

एक पेज पर फारसी तो दूसरे पर हिंदी में अनुवाद है

फारसी भाषा में लिखी दुर्लभ रामायण की मूल प्रति उत्तर प्रदेश के रामपुर की रजा लाइब्रेरी में रखी हुई है। प्रो. शाह अब्दुस्सलाम व डॉ. वकारुल हसन सिद्दीकी ने हिंदी में अनुवाद किया है। इसके हर पेज पर रामायण के प्रसंगों को बताया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2016 में ईरान के राष्ट्रपति डॉ. हसन रोहानी को इसी रामायण की प्रति भेंट की थी।

राम भगवाान में अटूट श्रद्धा है, बिना नहाए नहीं छूते

गांधी रोड निवासी एडवोकेट सिराज कुरैशी के पास सुमेर चंद्र द्वारा 1713 ईसवी की फारसी भाषा में लिखी रामायण की प्रति है। रामायण सनातनियों का पवित्र ग्रंथ है, इसलिए परिवार इसकी पवित्रता का पूरा ध्यान रखता है। कुरान की तरह रामायण को भी बिना नहाए हाथ नहीं लगाया जाता। परिवार के हर सदस्य की भगवान राम में आस्था है, इसलिए वह रामायण को पढ़ते भी हैं। इस परिवार का मानना है कि राम किसी एक समाज के नहीं बल्कि सबके हैं। एडवोकेट कुरैशी बताते हैं, उनके पिता एमएम कुरैशी सभी धर्मों को मानते थे और भगवान राम में उनकी आस्था व रामायण में अपार श्रद्धा थी, वह रामायण पढ़ते थे। उनके संस्कार ही परिवार को मिले हैं।

मेरी और मेरे परिवार में भगवान राम में पूर्ण आस्था है। इसे संयोग कहें या कुछ और कि 300 साल पहले फारसी में लिखी रामायण की प्रति हमारे पास है। कुरान की तरह रामायण को बिना नहाए हाथ नहीं लगाते। -सिराज कुरैशी, एडवोकेट

People's Reporter
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