
भोपाल। मैहर विधायक नारायण त्रिपाठी ने आखिरकार अपने विधायक के पद और बीजेपी दोनों से इस्तीफा दे ही दिया। लंबे समय से उनके पार्टी छोड़ने की अटकलें लग रही थीं। शुक्रवार सुबह उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा को अपना इस्तीफा भेज दिया। पृथक विंध्य राज्य की मांग को लेकर लंबे समय से अपनी ही पार्टी के खिलाफ बयान दे रहे नारायण त्रिपाठी का बीजेपी छोड़ना लगभग तय माना जा रहा था। बीजेपी ने भी इस बार के विधानसभा चुनाव में मैहर से उनका टिकट काट दिया था।
16 के बाद करेंगे आगे का फैसला
नारायण त्रिपाठी अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर 16 अक्टूबर के बाद फैसला लेंगे। उनकी कांग्रेस में घर वापसी होने की संभावना है, लेकिन कांग्रेस में विंध्य क्षेत्र के कद्दावर नेता अजय सिंह राहुल इसके विरोध में है। नारायण त्रिपाठी लंबे समय से पीसीसी चीफ कमलनाथ के संपर्क में हैं। बीजेपी ने उनके बागी तेवरों को देखते हुए ही उनका टिकट काटकर इस बार मैहर से कांग्रेस छोड़कर बीजेपी मे आए सिंधिया समर्थक श्रीकांत चतुर्वेदी को मैदान में उतारा है। ऐसे में प्रेशर पॉलिटिक्स के लिए पहचाने जाने वाले नारायण त्रिपाठी के सामने अपना वजूद बनाए रखने के लिए बीजेपी छोड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं था।
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— Peoples Samachar (@psamachar1) October 13, 2023
दल बदल के अनुभवी हैं त्रिपाठी
नारायण त्रिपाठी की राजनीति का आगाज समाजवादी पार्टी से हुआ था। 2003 में वे मैहर से सपा के टिकट पर लड़े और जीतने के बाद पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष भी बना दिए गए। 2009 में उन्होंने सपा का दामन छोड़कर कांग्रेस का हाथ थाम लिया। 2013 में वे कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतकर दूसरी बार विधायक बने लेकिन 2015 में विधायकी से इस्तीफा देकर बीजेपी में शामिल हो गए। 2015 के उपचुनाव में बीजेपी से जीते और 2018 का चुनाव भी बीजेपी के टिकट पर ही जीते। हालांकि, कमलनाथ सरकार के समय उन्होंने विधानसभा में पार्टी के खिलाफ वोट दे दिया था। इसके बाद उन्होंने पृथक विंध्य की मांग को लेकर अपना जन आंदोलन तेज कर दिया।