मुंबई। महाराष्ट्र भाजपा अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण सोमवार को लातूर में आयोजित एक चुनावी रैली में दिए गए विवादित बयान के बाद सुर्खियों में आ गए। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता विलासराव देशमुख के बारे में कहा था कि, आपके जोश को देखकर मैं पूरे भरोसे के साथ कह सकता हूं कि विलासराव देशमुख की यादें इस शहर से मिट जाएंगी। बयान के वायरल होने के बाद उनके बेटे रितेश देशमुख और अमित देशमुख ने तीखी प्रतिक्रिया दी, जबकि चव्हाण ने बाद में अपने बयान पर सफाई देते हुए माफी मांगी।
यह टिप्पणी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई और राजनीतिक दलों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। विवाद बढ़ने के बाद मंगलवार को चव्हाण ने बयान की सफाई दी और पूर्व मुख्यमंत्री के बेटों से माफी मांगी। उन्होंने कहा कि, उनका बयान राजनीतिक मकसद से नहीं था और अगर इससे किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो वे माफी मांगते हैं।
सोमवार को लातूर में भाजपा रैली के दौरान चव्हाण ने पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि, आपके जोश को देखकर मैं पूरे भरोसे के साथ कह सकता हूं कि विलासराव देशमुख की यादें इस शहर से मिट जाएंगी।
इस बयान पर तुरंत राजनीतिक हलकों में आलोचना शुरू हो गई। कांग्रेस पार्टी ने इसे पूर्व CM के सम्मान पर हमला बताया और कहा कि जनता के लिए जीने वालों की यादें किसी के बयान से नहीं मिट सकतीं।
पूर्व CM के छोटे बेटे और बॉलीवुड अभिनेता रितेश देशमुख ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो पोस्ट किया। वीडियो में उन्होंने हाथ जोड़कर कहा कि, जो लोग जनता के लिए जीते हैं, उनके नाम उनके दिलों में अंकित रहते हैं। जो लिखा गया उसे मिटाया जा सकता है, लेकिन जो दिल में लिखा है, उसे कोई मिटा नहीं सकता। रितेश के इस वीडियो ने सोशल मीडिया पर भारी समर्थन और प्रतिक्रिया बटोरी। जनता और फैंस ने उनके पिता की यादों और योगदान का सम्मान किया।
पूर्व CM के बड़े बेटे और कांग्रेस नेता अमित देशमुख ने भी चव्हाण के बयान की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि, किसी बाहरी व्यक्ति के कहने से उनके पिता की यादें मिट नहीं सकती। अमित ने इसे लातूर और मराठवाड़ा की जनता की भावनाओं पर चोट मानते हुए राजनीतिक रूप से गलत बताया।
विलासराव देशमुख लातूर के रहने वाले थे और दो बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रह चुके थे। वे 1999-2003 और 2004-2008 तक राज्य के सीएम रहे। इसके अलावा वे पूर्व केंद्रीय मंत्री भी रह चुके थे। उनका निधन 14 अगस्त 2012 को चेन्नई में 67 साल की उम्र में हुआ।
देशमुख की नीतियां और लातूर में उनके विकास कार्य आज भी लोगों द्वारा याद किए जाते हैं। उनकी लोकप्रियता और जनता के प्रति समर्पण के कारण उनका नाम मराठवाड़ा में आज भी सम्मान के साथ लिया जाता है।
15 जनवरी को लातूर में नगर निकाय चुनाव होने हैं। इसी सिलसिले से रैली में चव्हाण ने अपनी टिप्पणी की थी। उन्होंने बाद में सफाई दी कि उनका बयान पूर्व CM की आलोचना नहीं थी, बल्कि यह चुनावी ऊर्जा और कार्यकर्ताओं के उत्साह को दर्शाने का प्रयास था।
कांग्रेस पार्टी ने बयान जारी करते हुए कहा कि, लातूर से विलासराव देशमुख की यादें कोई नहीं मिटा सकता। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि, भाजपा नेताओं के ऐसे बयान सत्ता के अहंकार को दर्शाते हैं और मराठवाड़ा की जनता की भावनाओं की अनदेखी करते हैं। एनसीपी नेताओं ने भी चव्हाण के बयान पर नाराजगी जताई और कहा कि इस तरह के बयान चुनावी राजनीति में अनुचित हैं।
चव्हाण ने मंगलवार को पूर्व CM के बेटों से माफी मांगी। उन्होंने कहा कि, उनका बयान राजनीतिक मकसद से था और किसी की भावनाओं को चोट पहुंचाना उद्देश्य नहीं था। हालांकि, जब उनसे पूछा गया कि क्या वह लातूर की जनता से माफी मांगेंगे, तो उन्होंने स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया। चव्हाण ने कहा कि, स्थानीय निकाय चुनाव में नागरिक सुविधाओं और विकास के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित होना चाहिए।
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