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भिंड:लहार में संजीव नायक की 'नशा मुक्ति चौपाल' का असर, 267 गांवों में जागरूकता, 1 हजार से ज्यादा युवाओं की बदली जिंदगी

कभी जिन गांवों में नशे के कारण हर दिन झगड़े, तनाव और टूटते परिवारों की कहानियां सुनाई देती थीं, आज वहीं उम्मीद और बदलाव की नई इबारत लिखी जा रही है। यह परिवर्तन किसी योजना का परिणाम नहीं, बल्कि एक युवा के संकल्प, संवेदनशीलता और अथक प्रयासों की मिसाल है। भिंड जिले के लहार क्षेत्र के युवा एडवोकेट संजीव नायक ने गांवों में फैलती नशे की लत और उससे उपज रही सामाजिक बुराइयों को नजदीक से देखा।
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लहार में संजीव नायक की 'नशा मुक्ति चौपाल' का असर, 267 गांवों में जागरूकता, 1 हजार से ज्यादा युवाओं की बदली जिंदगी
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    अम्बरीश आनंद, ग्वालियर

    एडवोकेट संजीव नायक की नशा मुक्ति चौपाल मुहिम ने अब तक 267 गांवों में जागरूकता फैलाई है और 1 हजार से अधिक युवाओं को नशे से मुक्त कर नई जिंदगी की राह दिखाई है। इनमें से 7 गांव पूरी तरह नशामुक्त बन चुके हैं। कई युवा जो नशे के कारण परिवार से दूर हो चुके थे, आज खुद का काम कर सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं।

    नशे के खिलाफ एक संकल्प

    ग्रामीण इलाकों में नशे की लत एक गंभीर समस्या बन चुकी थी। परिवार टूट रहे थे, झगड़े बढ़ रहे थे और युवा अपना भविष्य खो रहे थे। इन्हीं हालातों ने संजीव नायक को अंदर तक झकझोर दिया। उन्होंने इस समस्या को सिर्फ देखा नहीं, बल्कि इसे खत्म करने का संकल्प लिया। यही संकल्प आगे चलकर नशा मुक्ति चौपाल की मुहिम बना।

    चौपाल बनी बदलाव का जरिया

    एडवोकेट संजीव नायक गांव-गांव जाकर चौपाल लगाते हैं, जहां वे लोगों से संवाद करते है। वे नशे के आदी लोगों और उनके परिवारों को साथ बैठाकर इसके दुष्परिणाम समझाते हैं। सबसे इमोशनल पल तब आता है जब वे झोली फैलाकर नशा छोड़ने की भीख मांगते हैं। संजीव नायक की ये बात लोगों पर इतना ज्यादा प्रभाव डालती है  कि लोग उसी समय नशे का सामान छोड़ देते हैं और नई जिंदगी की शुरुआत करते हैं।

    खेल में भी बनाई अलग पहचान

    संजीव नायक ने खेल क्षेत्र में भी अपनी मजबूत पहचान बनाई है। वे देशभर में आयोजित लगभग 20 मैराथन में भाग ले चुके हैं। इंदौर अंतरराष्ट्रीय तिरंगा रन (100 किमी) में वे मध्यप्रदेश के पहले और देश के तीसरे अधिवक्ता बने। हाल ही में नई दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम में उन्होंने 24 घंटे में 135 किमी दौड़ पूरी कर नया कीर्तिमान स्थापित किया।

    धमकियों के बीच संजीव ने हार नहीं मानी 

    नशामुक्ति की यह राह आसान नहीं रही। इस अभियान से शराब माफिया को नुकसान होता है, जिससे उन्हें धमकियां भी मिलीं। बावजूद इसके उनका संकल्प नहीं डिगा और वे लगातार काम करते रहे। आज महावीर गंज, शिकारपुरा, विजयपुरा और कन्हई का पुरा सहित 7 गांव नशामुक्त बन चुके हैं। यह सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि बदली हुई जिंदगियों की कहानी है।

    नशा छोड़कर लोगों की बदली जिंदगी 

    मिहोना निवासी ओमप्रकाश दोहरे ने बताया मैं इस कदर नशे की चपेट में था कि परिवार के हालातों से भी बेखबर था, लेकिन संजीव नायक की नशा मुक्ति चौपाल के जरिए और उनकी समझाइश से आज मैं खेती-मजदूरी कर अपने परिवार का अच्छे से भरण पोषण कर रहा हूं। आज मेरा जीवन पूरी तरह से बदल चुका है।  मैंने नशे के चलते काफी पैसा और समय बर्बाद किया, नशे ने हमें सालों पीछे लाकर खड़ा कर दिया था। आज मैं ऑटो ड्राइवर हूं और ऑटो चलाकर अपना घर का खर्चा चलाता हूं, नशा छोड़कर  आज मैं सुखी जीवन जी रहा हूं।

    Rohit Sharma
    By Rohit Sharma

    पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...Read More

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