
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर को उमर अब्दुल्ला के रूप में पूरे 10 साल बाद नया मुख्यमंत्री मिल गया है। नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने बुधवार को राज्य के मुख्यमंत्री पद शपथ ली। इसके साथ ही वे इस केंद्र शासित राज्य के पहले सीएम बन गए हैं। राज्यपाल मनोज सिन्हा ने डिप्टी सीएम सुरेंदर चौधरी, मंत्री सकीना इट्टू, जावेद राणा, जावेद डार, सतीश शर्मा को भी शपथ दिलाई। नई सरकार में कांग्रेस शामिल नहीं हुई है। वो बाहर से उमर अब्दुल्ला की सरकार को समर्थन दे रही है। यह समारोह शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (SKICC) में हुआ।
10 साल बाद बनी नई सरकार
जम्मू-कश्मीर में आखिरी बार विधानसभा चुनाव 2014 में हुए थे, जिसमें भाजपा और पीडीपी गठबंधन ने सरकार बनाई थी। हालांकि, 2018 में भाजपा ने महबूबा मुफ्ती सरकार से समर्थन वापस ले लिया, जिससे सरकार गिर गई और तब से जम्मू-कश्मीर में केंद्र का शासन लागू था।
नेशनल कॉन्फ्रेंस की जोरदार वापसी
जम्मू-कश्मीर में 10 साल बाद हुए विधानसभा चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस गठबंधन ने जीत हासिल की। 2024 के विधानसभा चुनाव में 90 सीटों में से नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) ने 42 सीटें, कांग्रेस ने 6 और CPI(M) ने एक सीट पर जीत हासिल की। ये सभी पार्टियां गठबंधन के तहत चुनाव लड़ रही थी। वहीं, बीजेपी 29 विधानसभा सीटों पर जीत हासिल करने में सफल रही।

एनसी प्रमुख फारूक अब्दुल्ला ने चुनावी नतीजों के बाद घोषणा की थी कि उमर अब्दुल्ला मुख्यमंत्री बनेंगे। 10 अक्टूबर को विधायक दल की बैठक में उमर अब्दुल्ला को नेता चुना गया और 11 अक्टूबर को उन्होंने राजभवन जाकर उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया। उमर अब्दुल्ला गांदरबल और बडगाम से चुनाव जीते हैं और संभावना है कि वह गांदरबल सीट बरकरार रखेंगे।
उमर अब्दुल्ला ने की बड़ी वापसी
भावी मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के लिए यह एक बड़ी राजनीतिक वापसी है। 2009 से 2015 तक वह जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री रहे। इस बार के विधानसभा चुनाव में उमर अब्दुल्ला ने अपनी किस्मत आजमाने के लिए दो विधानसभा सीटों गांदरबल और बडगाम को चुना। वह दोनों सीटों पर जीत दर्ज करने में सफल रहे। हालांकि, कुछ ही महीने पहले लोकसभा चुनाव 2024 में उन्हें बड़ा झटका लगा था, जब वह बारामूला सीट से निर्दलीय उम्मीदवार अब्दुल रशीद शेख से उन्हें करारी शिकस्त मिली थी।
13 अक्टूबर को हटा राष्ट्रपति शासन
जम्मू-कश्मीर में नई सरकार के गठन से पहले 13 अक्टूबर को राष्ट्रपति शासन हटाने का आदेश जारी कर दिया गया था। गृह मंत्रालय ने बताया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नए मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण से ठीक पहले राष्ट्रपति शासन समाप्त करने का आदेश दिया।

जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन का 2018 से अब तक का सफर…
- जून 2018- राज्यपाल शासन लागू
महबूबा मुफ्ती सरकार के गिरने के बाद राज्य के संविधान की धारा 92 के तहत जम्मू-कश्मीर में छह महीने के लिए राज्यपाल शासन लागू किया गया था। उस समय अनुच्छेद 370 प्रभावी होने के कारण राष्ट्रपति शासन लगाने से पहले यह प्रक्रिया अनिवार्य थी।
- 2019- अनुच्छेद 370 हटने के बाद राष्ट्रपति शासन
31 अक्टूबर 2019 को अनुच्छेद 370 और 35A हटाए जाने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विभाजित करने के बाद गृह मंत्रालय ने जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 की धारा 73 के तहत राष्ट्रपति शासन का आदेश जारी किया।
- नई सरकार से पहले राष्ट्रपति शासन का समाप्त होना जरूरी
नई सरकार को कार्यभार सौंपने के लिए संविधान के अनुसार विधानसभा के प्रावधानों को बहाल करना अनिवार्य है। राष्ट्रपति शासन के रहते हुए नई सरकार शपथ नहीं ले सकती, इसलिए नए मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण से पहले राष्ट्रपति शासन समाप्त करने का निर्णय लिया गया।
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