अमेरिका पर भरोसा नहीं...होर्मुज पर अपना नियंत्रण बढ़ाएगा ईरान; स्पीकर गालिबाफ का बड़ा बयान

तेहरान। ईरान के संसद अध्यक्ष और अमेरिका-ईरान वार्ता में अहम भूमिका निभा रहे मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने साफ कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट अब युद्ध से पहले जैसी स्थिति में नहीं लौटेगा। उन्होंने संकेत दिया कि दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट की निगरानी और प्रबंधन आगे ईरान अपने तरीके से करेगा, हालांकि अंतरराष्ट्रीय नियमों का सम्मान जारी रहेगा।
अमेरिका पर भरोसा नहीं, लेकिन बातचीत जारी- गालिबाफ
स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच तकनीकी स्तर की बातचीत के पहले दौर के बाद गालिबाफ ने कहा कि तेहरान को वॉशिंगटन पर कोई भरोसा नहीं है। उन्होंने कहा कि ईरान ने कभी अमेरिका पर भरोसा नहीं किया और भविष्य में भी सतर्क रहना ही समझदारी होगी।
गालिबाफ के मुताबिक, दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि ईरान ने अमेरिका के इरादों पर विश्वास कर लिया है। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय हालात को देखते हुए सावधानी बरतना जरूरी है।
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ट्रम्प के दावे को ईरान ने किया खारिज
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि ईरान अपने परमाणु ठिकानों की अंतरराष्ट्रीय जांच के लिए तैयार हो गया है। हालांकि ईरान ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है।
तेहरान का कहना है कि परमाणु कार्यक्रम को लेकर किसी नई सहमति पर बात नहीं बनी है और अमेरिका की ओर से किए जा रहे दावे वास्तविक स्थिति को नहीं दर्शाते। दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर मतभेद अभी भी बरकरार हैं।
बातचीत से कम हुआ क्षेत्रीय तनाव
गालिबाफ ने दावा किया कि अगर ईरान स्विट्जरलैंड में हुई वार्ता का हिस्सा नहीं बनता तो पश्चिम एशिया में हालात और बिगड़ सकते थे। उनके अनुसार, बातचीत की वजह से क्षेत्र में तनाव बढ़ने से रोका जा सका और लेबनान समेत कई संवेदनशील इलाकों में हिंसा का खतरा कम हुआ उन्होंने कहा कि संवाद का उद्देश्य केवल द्विपक्षीय मुद्दों का समाधान नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना भी है।
तेल प्रतिबंधों में राहत और नई उम्मीद
स्विट्जरलैंड वार्ता के बाद अमेरिका ने ईरानी तेल पर लगी कुछ पाबंदियों में 60 दिनों की राहत दी है। गालिबाफ ने कहा कि बातचीत के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं और इससे ईरान के रोके गए वित्तीय संसाधनों की वापसी का रास्ता भी खुल सकता है। उन्होंने बताया कि दोनों पक्ष एक उच्च स्तरीय समिति बनाने और अगले 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते के लिए रोडमैप तैयार करने पर सहमत हुए हैं। हालांकि उन्होंने दोहराया कि ईरान की राष्ट्रीय नीति और अंतिम निर्णय देश के सर्वोच्च नेता के मार्गदर्शन में ही लिए जाएंगे।











