समुद्र में भारत और पाकिस्तान के नेवी जहाज टकराए, भारत ने राजनयिक को किया तलब

नई दिल्ली। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, हालांकि इस घटना से कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन पाकिस्तानी नौसेना के जहाज का भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य अभ्यास, युद्धाभ्यास और सैनिकों की आवाजाही की अग्रिम सूचना पर हुए समझौते के अनुच्छेद 10 का सीधा उल्लंघन था। यह समझौता अप्रैल 1991 में हुआ था।
मंत्रालय ने क्या कहा?
जानकारी के अनुसार मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान के चार्ज डी'अफेयर्स को सलाह दी गई कि वे संबंधित अधिकारियों को बताएं कि सभी सैन्य यूनिट्स को उचित सावधानी बरतनी चाहिए। साथ ही यह भी कहा गया कि दोनों देशों के बीच संबंधित समझौतों का पालन करना चाहिए। चार्ज डी'अफेयर्स को कहा गया कि वे संबंधित पाकिस्तानी अधिकारियों को बताएं कि ऐसी घटनाओं को दोबारा होने से रोकने के लिए सभी सैन्य यूनिट्स को उचित सावधानी बरतनी चाहिए। इस संबंध में भारत के विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि इस्लामाबाद में भारत के चार्ज डी'अफेयर्स को पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के समक्ष इसी तरह का विरोध दर्ज कराने का निर्देश दिया गया है।
ये भी पढ़ें: PM मोदी के जन्मदिन से शुरू होगा ‘सेवा संकल्प अभियान’, 17 अक्टूबर तक होंगे जनसेवा कार्यक्रम; जानें क्या है खास
पहले भी हो चुकी है ऐसी घटना
पाकिस्तानी युद्धपोत PNS बाबर INS गोदावरी के बहुत करीब आ गया था। इससे INS गोदावरी पर हेलीकॉप्टर का जाल क्षतिग्रस्त हो गया था। घटना साल 2011 की है। इस घटना पर तत्कालीन नौसेना प्रमुख एडिमरल निर्मल वर्मा ने कहा था कि भारतीय चालक दल ने बहुत पेशेवर तरीके से काम किया और जोर दिया कि समुद्र में नेविगेशन के स्पष्ट नियम हैं।
1991 में हुआ था भारत-पाकिस्तान के बीच समझौता
बड़े सैन्य अभ्यास, युद्धाभ्यास और सैनिकों की आवाजाही की अग्रिम सूचना के लिए नियम तय करते हुए भारत और पाकिस्तान के बीच साल 1991 में समझौता हुआ था। इसके तहत दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे के करीब बड़े अभ्यास करने से बचना है। अगर तय इलाकों में ऐसी एक्सरसाइज की जाती हैं, तो मुख्य बल को दूसरी तरफ़ नहीं भेजा जा सकता और न ही उस इलाके के पास कोई लॉजिस्टिकल तैयारी की जा सकती है।



















