शरीर में हर सेकेंड बन रहा है खून...हड्डियों से लेकर दिल तक समझिए ब्लड सर्कुलेशन की पूरी कहानी

हेल्थ डेस्क। हम रोज सांस लेते हैं, चलते हैं, सोचते हैं और काम करते हैं, लेकिन शायद ही कभी इस पर ध्यान देते हैं कि यह सब संभव कैसे होता है। इस पूरी प्रक्रिया की सबसे बड़ी वजह है खून, जो हर पल हमारे शरीर की नस-नस में दौड़ रहा होता है।
खून सिर्फ शरीर में बहता ही नहीं, बल्कि हड्डियों के अंदर बनता है, दिल की ताकत से आगे बढ़ता है और नसों के जटिल जाल के ज़रिये शरीर के हर कोने तक पहुंचता है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि, खून कहां बनता है, कैसे बहता है और इसमें हड्डियों, दिल और नसों की क्या भूमिका होती है।
शरीर में कैसे बनता है खून?
अक्सर लोगों को लगता है कि, खून दिल में बनता होगा, लेकिन हकीकत यह है कि खून बनने की फैक्ट्री हड्डियों के अंदर होती है। हमारे शरीर की हड्डियों के बीच मौजूद एक नरम और स्पंजी पदार्थ को बोन मैरो कहा जाता है। यही बोन मैरो शरीर के लगभग 95 प्रतिशत खून का निर्माण करता है।
वयस्क अवस्था में खून बनने के लिए सबसे सक्रिय बोन मैरो इन हड्डियों में पाया जाता है-
- कूल्हे की हड्डियां
- सीने की हड्डी
- रीढ़ की हड्डियां
इसके अलावा लीवर, स्प्लीन (प्लीहा) और लिंफ नोड्स भी खून की कोशिकाओं को संतुलित रखने में मदद करते हैं।
खून की कोशिकाएं कैसे बनती हैं?
बोन मैरो में बनने वाला हर ब्लड सेल शुरुआत में स्टेम सेल होता है। यही स्टेम सेल आगे चलकर अलग-अलग तरह की खून की कोशिकाओं में बदलता है। जब ये कोशिकाएं पूरी तरह विकसित नहीं होतीं, तो इन्हें ब्लास्ट सेल कहा जाता है। समय के साथ ये तीन मुख्य प्रकार की कोशिकाओं में बदल जाती हैं-
- रेड ब्लड सेल्स (RBC)
- व्हाइट ब्लड सेल्स (WBC)
- प्लेटलेट्स
यही तीनों मिलकर हमारे शरीर के खून को बनाते हैं और ज़िंदगी को बनाए रखते हैं।
खून कैसे बहता है? क्या सिर्फ ग्रेविटी जिम्मेदार है?
अक्सर यह धारणा होती है कि, खून नीचे की ओर ग्रेविटी से और ऊपर की ओर किसी तरह चढ़ता है। लेकिन कार्डियक एक्सपर्ट डॉ. नरेश त्रेहान के अनुसार, यह सोच पूरी तरह सही नहीं है। दरअसल, दिल एक बेहद ताकतवर और एफिशिएंट पंप है, जो 24 घंटे बिना रुके काम करता है। दिल की बाईं तरफ से हाई प्रेशर के साथ ऑक्सीजन युक्त खून शरीर की आर्टरीज में भेजा जाता है।
यही प्रेशर खून को सिर से लेकर पैरों तक पहुंचाने में मदद करता है। चाहे इंसान खड़ा हो, बैठा हो या लेटा हो, दिल की पंपिंग से खून लगातार बहता रहता है।
वेंस में खून वापस दिल तक कैसे पहुंचता है?
शरीर की वेंस (शिराएं) खून को वापस दिल तक लाने का काम करती हैं। यहां सिर्फ दिल ही नहीं, बल्कि मांसपेशियां और वाल्व भी अहम भूमिका निभाते हैं। जब हम चलते हैं, उठते-बैठते हैं या पैरों को हिलाते हैं, तो मांसपेशियां नसों को दबाती हैं। इससे खून ऊपर की ओर दिल की तरफ बढ़ता है। वेंस में मौजूद वाल्व खून को पीछे की ओर बहने से रोकते हैं। यही वजह है कि, लंबे समय तक एक जगह खड़े रहने से पैरों में खून जमा हो सकता है और सूजन आ जाती है।
शरीर में कितनी तरह की नसें होती हैं?
खून को पूरे शरीर में पहुंचाने के लिए रक्त वाहिकाओं का एक बड़ा नेटवर्क होता है। ये तीन प्रकार की होती हैं:
आर्टरी (धमनियां)
- दिल से ऑक्सीजन युक्त खून शरीर के अंगों तक ले जाती हैं।
- इनकी दीवारें मोटी और मजबूत होती हैं।
- हाई ब्लड प्रेशर को सहन करने में सक्षम होती हैं।
वेन्स (शिराएं)
- शरीर से खून वापस दिल तक लाती हैं।
- इनकी दीवारें पतली होती हैं।
- खून के बहाव के लिए वाल्व पर निर्भर रहती हैं।
कैपिलरीज (केशिकाएं)
- शरीर की सबसे पतली रक्त वाहिकाएं।
- आर्टरी और वेन्स को जोड़ती हैं।
- यहीं से ऑक्सीजन और पोषक तत्व सीधे कोशिकाओं तक पहुंचते हैं।
खून शरीर में क्या-क्या काम करता है?
खून सिर्फ एक तरल नहीं, बल्कि शरीर का लाइफ सपोर्ट सिस्टम है। इसके मुख्य काम हैं-
- ऑक्सीजन को फेफड़ों से कोशिकाओं तक पहुंचाना।
- पोषक तत्व और विटामिन शरीर के हर हिस्से तक ले जाना।
- इंफेक्शन से लड़ने में मदद करना।
- हार्मोन और एंटीबॉडी ढोना।
- शरीर से कार्बन डाइऑक्साइड और वेस्ट मटीरियल बाहर निकालना।
- शरीर का तापमान संतुलित रखना।
अगर कुछ मिनटों के लिए भी दिमाग तक खून और ऑक्सीजन न पहुंचे, तो यह जानलेवा हो सकता है।
खून में गड़बड़ी के संकेत
अगर शरीर में किसी भी ब्लड सेल की कमी हो जाए, तो इसके लक्षण दिखने लगते हैं, जैसे-
- लगातार थकान
- चक्कर आना
- बार-बार इंफेक्शन
- चोट लगने पर ज्यादा खून बहना
ऐसे लक्षण दिखने पर डॉक्टर से जांच जरूरी होती है।
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