War Impact:दुनियाभर में खाने-पीने की चीजें महंगी, 3 साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचीं कीमतें

दुनियाभर में खाने-पीने की चीजों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन (FAO) के मुताबिक अप्रैल 2026 में ग्लोबल फूड कमोडिटी प्राइस इंडेक्स 1.6% बढ़ गया। यह पिछले साल की तुलना में 2.5% ज्यादा है और बीते तीन साल का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसकी सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ा तनाव और समुद्री व्यापार पर पड़ा असर है।
हॉर्मुज रूट बंद होने से बढ़ी मुश्किलें
अमेरिका-ईरान संघर्ष को करीब 10 हफ्ते हो चुके हैं। इस दौरान हॉर्मुज रूट बंद होने से डीजल, फर्टिलाइजर और खेती से जुड़े जरूरी सामान की सप्लाई प्रभावित हुई है। हॉर्मुज दुनिया के सबसे अहम तेल और व्यापारिक समुद्री मार्गों में शामिल है। इसके प्रभावित होने से ईंधन और खाद दोनों महंगे हो गए हैं जिसका सीधा असर खेती की लागत पर पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यही स्थिति बनी रही तो आने वाले महीनों में आम लोगों की रसोई का बजट और बिगड़ सकता है।
वेजिटेबल ऑयल की कीमतों में सबसे ज्यादा उछाल
FAO रिपोर्ट के मुताबिक सबसे ज्यादा असर वेजिटेबल ऑयल पर पड़ा है। कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से बायो-फ्यूल की मांग बढ़ गई है जिसके चलते वेजिटेबल ऑयल की कीमतें मार्च के मुकाबले 5.9% बढ़ गईं। यह जुलाई 2022 के बाद सबसे बड़ी बढ़ोतरी है। इसके अलावा मीट की कीमतों में 1.2% की तेजी दर्ज की गई है जो अब तक का रिकॉर्ड स्तर बताया जा रहा है। वहीं अनाज की कीमतों में भी 0.8% की बढ़ोतरी हुई है।
UN ने दी बड़ी चेतावनी
FAO के चीफ इकोनॉमिस्ट मैक्सिमो टोरेरो ने कहा कि फिलहाल कंपनियां पुराने स्टॉक के सहारे बाजार संभाल रही हैं लेकिन जैसे ही बढ़ी हुई लागत पूरी तरह बाजार में आएगी, उपभोक्ताओं को महंगाई का बड़ा झटका लग सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यह भू-राजनीतिक तनाव 90 दिनों से ज्यादा चला तो 2026 के आखिर और 2027 में ग्लोबल खाद्य संकट की स्थिति बन सकती है।
खराब मौसम और कम बुआई ने बढ़ाई चिंता
रिपोर्ट में कहा गया है कि कई देशों में खराब मौसम और गेहूं की कम बुआई की खबरों ने भी अनाज बाजार पर दबाव बढ़ा दिया है। खाद की कीमतें बढ़ने से किसान अब ऐसी फसलों की तरफ झुक रहे हैं जिनमें कम फर्टिलाइजर लगता हो। इससे आने वाले समय में कई खाद्य उत्पादों की सप्लाई प्रभावित हो सकती है।
भारत में भी बढ़ने लगी खाने की महंगाई
बैंक ऑफ बड़ौदा के ‘एसेंशियल कमोडिटी इंडेक्स’ के मुताबिक अप्रैल 2026 में भारत का महंगाई सूचकांक सालाना आधार पर 1.1% और मासिक आधार पर 0.3% बढ़ा है। यह अगस्त 2025 के बाद सबसे तेज मासिक बढ़ोतरी मानी जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार जरूरी इस्तेमाल की 20 वस्तुओं में से 16 की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। खासकर खाने के तेल, टमाटर और अन्य जरूरी सामानों की कीमतों में 36% तक उछाल देखने को मिला है। इसी वजह से अप्रैल में रिटेल महंगाई 4% तक पहुंच गई।
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आने वाले महीनों में और बढ़ सकती है महंगाई
विशेषज्ञों का कहना है कि कमोडिटी बाजार में आई तेजी का असर धीरे-धीरे रिटेल बाजार में दिखेगा। मई महीने में भी कई खाद्य वस्तुओं की कीमतें बढ़ रही हैं जिससे आने वाले समय में आम लोगों पर महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है।












