नेशनल डेस्क। ओडिशा के नबरंगपुर जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक पूर्व विधायक को अपनी ही बेटी की अंतरजातीय सगाई कराने के कारण समाज के बहिष्कार का सामना करना पड़ रहा है। भतरा समाज ने आरोप लगाया है कि परंपराओं और सामाजिक नियमों की अनदेखी करते हुए पूर्व विधायक ने बेटी की शादी दूसरी जाति में तय की है। इस फैसले के बाद इलाके में इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है और सामाजिक परंपरा बनाम व्यक्तिगत अधिकार को लेकर बहस छिड़ गई है।
झरिगांव ब्लॉक के धामनागुड़ा गांव स्थित दंतेश्वरी मंदिर परिसर में अखिल भारतीय भतरा विकास परिषद की अहम बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में जिले के 10 ब्लॉकों से समाज के प्रतिनिधि और कार्यकर्ता शामिल हुए। लंबे विचार-विमर्श के बाद परिषद ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि समाज के नियमों के उल्लंघन के आरोप में पूर्व विधायक सदाशिव प्रधानि और उनके परिवार का सामाजिक बहिष्कार किया जाए। परिषद का कहना है कि समाज की परंपराओं का पालन करना सभी सदस्यों के लिए अनिवार्य माना जाता है।
बताया जा रहा है कि पूर्व विधायक की बेटी की सगाई ब्राह्मण समाज के एक युवक से हुई है और अगले महीने विवाह होने की संभावना जताई जा रही है। परिषद के पदाधिकारियों का कहना है कि भतरा समाज में पारंपरिक रूप से अंतरजातीय विवाह को स्वीकार नहीं किया जाता और इसे सामाजिक व्यवस्था के विपरीत माना जाता है। इस फैसले के बाद स्थानीय स्तर पर मतभेद और चर्चा का माहौल बन गया है, जहां कुछ लोग परंपरा का समर्थन कर रहे हैं, तो कुछ व्यक्तिगत स्वतंत्रता को प्राथमिकता देने की बात कर रहे हैं।
भतरा समाज में यह पहला मामला नहीं है जब अंतरजातीय विवाह को लेकर कड़ा कदम उठाया गया हो। इससे पहले भी ऐसे मामलों में सामाजिक कार्रवाई की गई है। पूर्व लोकसभा सांसद प्रदीप माझी को भी अंतरजातीय विवाह के कारण करीब 12 वर्षों के लिए समाज से बहिष्कृत किया गया था। फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम पर पूर्व विधायक या उनके परिवार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन इस मुद्दे ने सामाजिक और राजनीतिक हलकों में बहस जरूर तेज कर दी है।