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30 के बाद शरीर दे रहा है बुढ़ापे के संकेत?नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी, नई स्टडी में कैंसर को लेकर बड़ा खुलासा

क्या आपकी जैविक उम्र आपकी वास्तविक उम्र से ज्यादा है? नई रिसर्च में दावा किया गया है कि तेजी से बढ़ती जैविक उम्र कम उम्र में कैंसर के खतरे को बढ़ा सकती है। जानिए क्या है बायोलॉजिकल एज, क्यों बढ़ रहा है जोखिम और इससे बचाव के उपाय।
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नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी, नई स्टडी में कैंसर को लेकर बड़ा खुलासा

भोपाल। अगर आपकी उम्र 30 साल है, तो जरूरी नहीं कि आपका शरीर भी उतना ही जवान हो। हो सकता है कि शरीर के अंदरूनी अंग 40 या 45 साल की तरह काम कर रहे हों। यही अंतर अब वैज्ञानिकों के लिए चिंता का विषय बन गया है। एक नई अंतरराष्ट्रीय रिसर्च में सामने आया है कि आज की युवा पीढ़ी जैविक रूप से पहले की तुलना में तेजी से बूढ़ी हो रही है और यही बदलाव कम उम्र में कैंसर के बढ़ते मामलों की एक बड़ी वजह हो सकता है।

वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन (सेंट लुइस) के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए इस अध्ययन को प्रतिष्ठित जर्नल Nature Medicine में प्रकाशित किया गया है। शोधकर्ताओं का मानना है कि शरीर की जैविक उम्र (Biological Age) और वास्तविक उम्र (Chronological Age) के बीच बढ़ता अंतर भविष्य में कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा सकता है।

क्या होती है जैविक उम्र और वास्तविक उम्र?

हमारी जन्मतिथि के आधार पर तय होने वाली उम्र को वास्तविक या क्रोनोलॉजिकल उम्र कहा जाता है। लेकिन शरीर के अंग कितने स्वस्थ हैं, कोशिकाएं कितनी तेजी से बूढ़ी हो रही हैं और शरीर कितनी क्षमता से काम कर रहा है, यह जैविक उम्र तय करती है। यही वजह है कि दो लोगों की उम्र 35 साल हो सकती है, लेकिन एक व्यक्ति का शरीर 30 साल जैसा स्वस्थ हो, जबकि दूसरे का शरीर 45 साल जैसा कमजोर हो सकता है।

कम उम्र में क्यों बढ़ रहे हैं कैंसर के मामले?

कुछ दशक पहले तक कैंसर को बढ़ती उम्र की बीमारी माना जाता था। लेकिन अब डॉक्टरों के सामने 30 से 50 वर्ष की उम्र के लोगों में भी कैंसर के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। विशेषज्ञ इसे अर्ली-ऑनसेट कैंसर (Early-Onset Cancer) कहते हैं। इसमें मुख्य रूप से कोलोरेक्टल (आंत) कैंसर, फेफड़ों का कैंसर, गर्भाशय का कैंसर और अन्य ठोस ट्यूमर जैसे कैंसर शामिल हैं।

पहले इन मामलों को केवल आनुवंशिक कारणों या खराब जीवनशैली से जोड़ा जाता था, लेकिन अब वैज्ञानिकों को इसके पीछे जैविक उम्र का भी बड़ा संबंध दिखाई दे रहा है।

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कैसे किया गया यह अध्ययन?

शोधकर्ताओं ने दो बड़े अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य डेटाबेस का विश्लेषण किया।

देश

प्रतिभागी

यूनाइटेड किंगडम

1.54 लाख से अधिक लोग

अमेरिका

10 हजार से अधिक लोग

वैज्ञानिकों ने प्रतिभागियों के रक्त के नमूनों में मौजूद बायोमार्कर का अध्ययन किया। ये बायोमार्कर शरीर के मेटाबॉलिज्म, अंगों की कार्यक्षमता और उम्र बढ़ने की गति का संकेत देते हैं। इसके अलावा शरीर के अलग-अलग अंगों और ऊतकों से जुड़े प्रोटीन का भी विश्लेषण किया गया ताकि यह समझा जा सके कि कौन-सा अंग सबसे तेजी से बूढ़ा हो रहा है।

रिसर्च में क्या सामने आया?

अध्ययन के नतीजों ने वैज्ञानिकों को चौंका दिया। शोध में पाया गया कि 1965 के बाद और विशेष रूप से 1990 के दशक में जन्मे लोगों की जैविक उम्र, पिछली पीढ़ियों की तुलना में कहीं तेजी से बढ़ रही है। यानी नई पीढ़ी का शरीर कम उम्र में ही अधिक उम्र वाले व्यक्ति जैसा व्यवहार करने लगा है। यह ट्रेंड अमेरिका और ब्रिटेन दोनों देशों में लगभग समान पाया गया।

कैंसर का खतरा कितना बढ़ जाता है?

रिसर्च के अनुसार जिन लोगों की जैविक उम्र उनकी वास्तविक उम्र से काफी अधिक थी, उनमें कम उम्र में कैंसर होने का खतरा भी ज्यादा पाया गया। सबसे अधिक जैविक उम्र वाले लोगों में शुरुआती चरण के ठोस ट्यूमर विकसित होने का खतरा लगभग 15 प्रतिशत अधिक देखा गया। हालांकि, यह अध्ययन सीधे यह साबित नहीं करता कि जैविक उम्र ही कैंसर का कारण है, लेकिन दोनों के बीच मजबूत संबंध जरूर दिखाई देता है।

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किन अंगों के तेजी से बूढ़ा होने से बढ़ा खतरा?

शोध में शरीर के कुछ विशेष अंगों और ऊतकों पर खास ध्यान दिया गया।

1. प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System)

जिन लोगों का इम्यून सिस्टम उनकी उम्र से ज्यादा बूढ़ा दिखाई दिया, उनमें फेफड़ों के कैंसर का खतरा अधिक पाया गया।

2. वसा ऊतक (Fat Tissue)

जिन लोगों के फैट टिश्यू तेजी से बूढ़े हो रहे थे, उनमें कोलोरेक्टल यानी आंत के कैंसर का जोखिम ज्यादा मिला।

आखिर शरीर समय से पहले बूढ़ा क्यों हो रहा है?

इसके पीछे कोई एक कारण नहीं बल्कि कई जीवनशैली और पर्यावरणीय कारक जिम्मेदार हैं। इनमें प्रमुख कारण हैं-

  • मोटापा
  • प्रोसेस्ड फूड का अधिक सेवन
  • अत्यधिक चीनी वाला आहार
  • इंसुलिन रेजिस्टेंस
  • फैटी लिवर
  • शारीरिक गतिविधि की कमी
  • लंबे समय तक बैठकर काम करना
  • पर्याप्त नींद न लेना
  • मानसिक तनाव
  • धूम्रपान
  • प्रदूषण
  • पर्यावरणीय बदलाव

इन सभी कारणों का असर धीरे-धीरे शरीर की कोशिकाओं पर पड़ता है, जिससे वे समय से पहले बूढ़ी होने लगती हैं।

डीएनए को भी होता है नुकसान

उम्र बढ़ने के साथ कोशिकाओं के डीएनए को नुकसान होना सामान्य प्रक्रिया है। लेकिन अगर यही नुकसान कम उम्र में तेजी से होने लगे तो शरीर की मरम्मत करने की क्षमता घटने लगती है। इससे कई गंभीर बीमारियों, विशेष रूप से कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।

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क्या जैविक उम्र को कम किया जा सकता है?

जैविक उम्र बढ़ने की रफ्तार को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। इसके लिए कुछ आसान लेकिन प्रभावी आदतें अपनानी चाहिए-

  • रोजाना कम से कम 30-45 मिनट व्यायाम करें।
  • संतुलित और पौष्टिक भोजन लें।
  • प्रोसेस्ड फूड और अधिक चीनी से बचें।
  • वजन नियंत्रित रखें।
  • धूम्रपान और तंबाकू से दूरी बनाएं।
  • रोज 7 से 8 घंटे की अच्छी नींद लें।
  • तनाव कम करने के लिए योग और मेडिटेशन करें।
  • नियमित हेल्थ चेकअप कराते रहें।

कम उम्र में पहचान होगी तो बचाव आसान होगा

शोधकर्ताओं का मानना है कि, अगर भविष्य में ऐसे लोगों की पहचान शुरुआती चरण में की जा सके जिनकी जैविक उम्र तेजी से बढ़ रही है, तो समय रहते उनकी स्क्रीनिंग और निगरानी की जा सकती है। इससे कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का खतरा कम करने में मदद मिल सकती है।

हालांकि यह अध्ययन जैविक उम्र और कैंसर के बीच मजबूत संबंध दिखाता है, लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि यह अभी शुरुआती निष्कर्ष हैं। आने वाले सालों में और व्यापक शोध किए जाएंगे ताकि यह समझा जा सके कि आधुनिक जीवनशैली, पर्यावरण और खानपान शरीर की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को किस तरह प्रभावित करते हैं।

Manisha Dhanwani
By Manisha Dhanwani

मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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