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इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला : ‘मस्जिद में लाउडस्पीकर लगाना मौलिक अधिकार नहीं’

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मस्जिदों में लाउडस्पीकर से अजान को लेकर दाखिल अर्जी को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा, लाउडस्पीकर से अजान देना मौलिक अधिकार नहीं है। कोर्ट ने कहा कि अजान इस्लाम का अभिन्न अंग है, लेकिन लाउडस्पीकर से करना नहीं।

क्या है पूरा मामला ?

दरअसल, बदायूं के बिसौली तहसील के धोरनपुर गांव की नूरी मस्जिद के मुतवल्ली इरफान की तरफ से याचिका दाखिल की गई थी। याचिका में एसडीएम समेत तीन लोगों को पक्षकार बनाया गया था। बता दें कि एसडीएम द्वारा लाउडस्पीकर के इस्तेमाल की इजाजत वाली अर्जी को खारिज किए जाने को चुनौती दी गई थी।

जस्टिस वीके बिड़ला और जस्टिस विकास ने इस याचिका पर सुनवाई की। इसे खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा, अब ये स्टेबलिस्ट हो चुका है कि मस्जिदों पर लाउडस्पीकर का उपयोग मौलिक अधिकार नहीं है। कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया है।

क्या है सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस ?

सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस है कि रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर का प्रयोग ना किया जाए। हालांकि, ऑडिटोरियम, कॉन्फ्रेंस हॉल, कम्युनिटी और बैंक्वेट हॉल जैसे बंद स्थानों पर इसे बजा सकते हैं। लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को लेकर संविधान में नॉयज पॉल्यूशन (रेगुलेशन एंड कंट्रोल) रूल्स, 2000 में प्रावधान है।

इन नियमों का उल्लंघन करने पर कैद और जुर्माने दोनों सजा का प्रावधान है। इसके लिए एन्वार्यमेंट (प्रोटेक्शन) एक्ट, 1986 में प्रावधान है। इसके तहत इन नियमों का उल्लंघन करने पर 5 साल कैद और 1 लाख रुपये तक का जुर्माना लग सकता है।

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