भोपाल। दुनिया की सबसे भयावह औद्योगिक दुर्घटनाओं में गिनी जाने वाली भोपाल गैस त्रासदी को चार दशक से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन इस हादसे से जुड़े कई मुद्दे आज भी पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। सबसे बड़ा सवाल अब भी यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री परिसर में मौजूद जहरीले कचरे और प्रदूषण को लेकर है।
इसी मामले में अब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए राज्य सरकार से फैक्ट्री परिसर की सफाई और पर्यावरण सुधार की पूरी योजना पेश करने को कहा है। अदालत ने पूछा है कि यूनियन कार्बाइड साइट पर मौजूद जहरीले कचरे को हटाने और जमीन-पानी को साफ करने के लिए सरकार ने क्या ठोस कदम उठाए हैं।
इस मामले में राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के सामने एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) दाखिल की है। रिपोर्ट में बताया गया कि, 3 मार्च को अतिरिक्त मुख्य सचिव अशोक बर्नवाल की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड (UCIL) के पुराने प्लांट की स्थिति, वहां मौजूद टॉक्सिक वेस्ट और फैक्ट्री परिसर की सफाई को लेकर विस्तृत चर्चा हुई।
सरकार ने अदालत को बताया कि, इस बैठक में अधिकारियों और विशेषज्ञों ने समयबद्ध रेमेडिएशन (Remediation) यानी प्रदूषित जमीन और पर्यावरण को साफ करने की योजना पर विचार किया। इसका उद्देश्य फैक्ट्री परिसर में मौजूद जहरीले कचरे को सुरक्षित तरीके से हटाना और पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम करना है।
सरकारी रिपोर्ट के अनुसार यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री परिसर में कई जगहों पर अभी भी जहरीला औद्योगिक कचरा और प्रदूषित मिट्टी मौजूद है। यह कचरा लंबे समय से पर्यावरण और आसपास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य के लिए चिंता का कारण बना हुआ है। इसलिए बैठक में यह तय किया गया कि फैक्ट्री परिसर से जहरीले कचरे को हटाने और उसका वैज्ञानिक तरीके से निपटान करने के लिए एक स्पष्ट और समयबद्ध योजना बनाई जाए।
सरकार ने कोर्ट को बताया कि, इस दिशा में संबंधित विभागों के साथ मिलकर काम किया जा रहा है और जल्द ही पूरी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।
हाईकोर्ट ने इस मामले में सरकार से यह भी पूछा है कि, सफाई और पर्यावरण सुधार का काम कब तक पूरा किया जाएगा। अदालत का मानना है कि इतनी बड़ी त्रासदी के बाद भी अगर फैक्ट्री परिसर में जहरीला कचरा मौजूद है तो यह बेहद गंभीर मामला है। कोर्ट ने संकेत दिया कि इस काम को जल्द से जल्द पूरा करना जरूरी है, ताकि आसपास रहने वाले लोगों को किसी तरह का स्वास्थ्य खतरा न रहे।
दरअसल 2 और 3 दिसंबर 1984 की रात भोपाल में यूनियन कार्बाइड के कीटनाशक कारखाने से मिथाइल आइसोसाइनेट (MIC) नाम की जहरीली गैस का रिसाव हो गया था। इस गैस के फैलने से हजारों लोगों की तत्काल मौत हो गई थी और लाखों लोग गंभीर रूप से प्रभावित हुए थे। यह हादसा दुनिया की सबसे बड़ी औद्योगिक त्रासदियों में से एक माना जाता है। गैस के प्रभाव से प्रभावित लोगों में कई को आज भी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा फैक्ट्री परिसर में मौजूद रासायनिक कचरे को लेकर भी लंबे समय से चिंता जताई जाती रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि, यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री परिसर में लंबे समय तक पड़े जहरीले रसायनों के कारण मिट्टी और भूजल प्रदूषण का खतरा बना रहता है। कई रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि अगर इस कचरे का समय पर निपटान नहीं किया गया तो इसका असर आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ सकता है।
इसी वजह से सामाजिक संगठनों और गैस पीड़ितों के समूह लंबे समय से इस साइट की पूरी सफाई और कचरे के सुरक्षित निपटान की मांग करते रहे हैं।
भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों के संगठन पिछले कई सालों से सरकार से यह मांग करते आ रहे हैं कि यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री परिसर में मौजूद जहरीले कचरे को जल्द से जल्द हटाया जाए। उनका कहना है कि, जब तक यह कचरा पूरी तरह साफ नहीं होगा, तब तक क्षेत्र के पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य पर खतरा बना रहेगा। इसी मुद्दे को लेकर समय-समय पर अदालत में भी याचिकाएं दायर की गई हैं।
राज्य सरकार का कहना है कि यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री परिसर की सफाई और पर्यावरण सुधार के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार ने कोर्ट को बताया कि, विशेषज्ञों की सलाह से सुरक्षित और वैज्ञानिक तरीके से कचरे का निपटान करने की प्रक्रिया तैयार की जा रही है। इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि इस प्रक्रिया के दौरान आसपास के लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो।
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब इस मामले की प्रगति पर अदालत की नजर बनी रहेगी। सरकार को क्लीन-अप प्लान, उसकी समयसीमा और अब तक किए गए काम की पूरी जानकारी अदालत के सामने पेश करनी होगी।
अगली सुनवाई में कोर्ट यह देखेगा कि यूनियन कार्बाइड साइट की सफाई और पर्यावरण सुधार के लिए उठाए गए कदम कितने प्रभावी हैं।
भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों और सामाजिक संगठनों को उम्मीद है कि हाईकोर्ट की सख्ती के बाद यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री परिसर की सफाई का काम तेज होगा। चार दशक से अधिक समय से लंबित इस मुद्दे के समाधान से न सिर्फ पर्यावरण को राहत मिलेगी, बल्कि प्रभावित लोगों को भी न्याय मिलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जाएगा।
भोपाल गैस त्रासदी भारत के औद्योगिक इतिहास का एक दर्दनाक अध्याय है। ऐसे में यूनियन कार्बाइड साइट की पूरी सफाई और पर्यावरण सुधार को लेकर उठाया गया हर कदम इस त्रासदी से जुड़े घावों को भरने की दिशा में अहम माना जा रहा है।