संजय दुबे, जबलपुर। उमरिया जिले के आदिवासी विकासखंड पाली के अंतर्गत ग्राम पंचायत चांदपुर का बाघन्नारा गांव में आजादी के 7 दशक बाद भी बिजली से महरूम है। यहां के 100 से अधिक बैगा जनजाति परिवार लालटेन, ढिबरी और दीए की रोशनी में रात बिताने को मजबूर हैं।
गांव के पूर्व सरपंच छोटेलाल बैगा बताते हैं, लगभग चार-पांच साल पहले गांव में बिजली के खंभे, ट्रांसफार्मर और तार तो लगा दिए गए, लेकिन आज तक सप्लाई शुरू नहीं हुई। अधिकारी से लेकर मंत्री तक को आवेदन दिया गया, पर सुनवाई नहीं हुई। होली, दीपावली, तीज-त्योहार सब दीपक और ढिबरी की रोशनी में ही मनाना पड़ता है।
गांव की सुलोचना बैगा, सुमन, पुष्पा बैगा, करण बैगा आदि प्रायमरी स्कूल में पढ़ते हैं। इन बच्चों का दर्द है कि रात में लाइट नहीं होने से हम पढ़ाई नहीं कर पाते हैं। दीपक की रोशनी में परीक्षा की तैयारी करनी पड़ती है। बच्चों ने कहा, हम सरकार से मांग करते हैं कि हमारे गांव में भी बिजली की समस्या दूर करें, ताकि हम भी पढ़-लिखकर सरकारी नौकरी पा सकें।
बाघन्नारा निवासी मोहन बैगा, छोटेलाल बैगा, रजिया बाई आदि ने बताया कि गांव में बिजली नहीं होने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। अंधेरे में डूबे गांव के युवाओं से शादी करने के लिए कोई रिश्ते लेकर आने को तैयार नहीं होता है।
गांव के किसान सिंचाई सुविधाओं के अभाव में खेती नहीं कर पा रहे हैं। जल जीवन मिशन के तहत बनी पानी की टंकी से पानी सप्लाई बिजली के अभाव में बंद पड़ी है।
गेंदी बाई बैगा, सरपंच, बाघन्नारा
पूर्व सरपंच सहित ग्रामीणों ने बिजली समस्या को लेकर ज्ञापन सौंपा है। संबंधित विभाग को उचित कार्यवाही के निर्देश दिए गए हैं।
लक्ष्मीकांत शर्मा, तहसीलदार, पाली
बैगा आदिवासियों की विद्युत समस्या को लेकर जब मंगठार उपयंत्री सुरुचि से बात की गई तो उन्होंने मानपुर जेई संदीप सोनी से बात करने को कहा। संदीप सोनी ने शहडोल के जेई अहिरवार का नंबर दिया, उन्होंने उपयंत्री राजेश कुमार प्रजापति से बात करने को कहा। प्रजापति ने इसे उमरिया जिले का मामला बताते हुए फोन काट दिया।