नई दिल्ली। चुनाव आयोग चार राज्यों पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और एक केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रहा है। इसके लिए अगले महीने चुनाव कार्यक्रम घोषित किया जा सकता है। सूत्रों के अनुसार इन राज्यों में चुनाव अप्रैल में अलग-अलग तारीखों अलग-अलग चरणों में होंगे।
देश के पांच महत्वपूर्ण राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश की विधानसभाओं का कार्यकाल मई और जून में अलग-अलग तिथियों पर समाप्त होने जा रहा है। असम का कार्यकाल 20 मई, केरल का 23 मई, तमिलनाडु का 10 मई और पश्चिम बंगाल का 7 मई को समाप्त हो रहा है। पुडुचेरी विधानसभा का पांच वर्षीय कार्यकाल 15 जून को खत्म होगा। जैसे-जैसे समयसीमा नजदीक आ रही है, चुनावी तैयारियां तेज हो गई हैं। चुनाव आयोग ने जमीनी हालात का आकलन शुरू कर दिया है और इसी सिलसिले में उसकी टीम असम का दौरा कर तैयारियों की समीक्षा कर रही है।
अगर पिछली बार के चुनावी पैटर्न पर नजर डालें तो पश्चिम बंगाल में आठ चरणों में मतदान हुआ था, जो अब तक का सबसे लंबा चुनाव कार्यक्रम माना गया। असम में दो चरणों में मतदान हुआ था, जबकि तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में एक ही चरण में चुनाव संपन्न कराए गए थे। इस बार भी सुरक्षा, लॉजिस्टिक्स और राजनीतिक संवेदनशीलता को देखते हुए चरणबद्ध मतदान की संभावना पर चर्चा जारी है। मतदाता सूची संशोधन के तहत पुडुचेरी ने 14 फरवरी को अपनी अंतिम सूची प्रकाशित कर चुनावी प्रक्रिया में बढ़त हासिल कर ली है।
अब अन्य राज्यों में भी अंतिम मतदाता सूची जारी करने की तैयारी पूरी हो चुकी है। तमिलनाडु विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद अंतिम सूची प्रकाशित करेगा, जबकि केरल 21 फरवरी को इसे जारी करेगा। पश्चिम बंगाल की अंतिम सूची 28 फरवरी को सामने आएगी। यह प्रक्रिया इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि अद्यतन मतदाता सूची निष्पक्ष चुनाव की बुनियाद होती है और इससे नए मतदाताओं को जोड़ने का अवसर मिलता है।
पश्चिम बंगाल में SIR को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस मुद्दे पर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि मतदाता सूची संशोधन की प्रक्रिया राजनीतिक रूप से प्रभावित हो सकती है। दूसरी ओर, असम में SIR की बजाय ‘विशेष संशोधन’ अपनाया गया, जिसके तहत 10 फरवरी को अंतिम सूची प्रकाशित कर दी गई। इन घटनाक्रमों से स्पष्ट है कि आगामी चुनाव केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी बेहद अहम होने वाले हैं।