
रामचन्द्र पाण्डेय, भोपाल। कोराना के बाद छात्र-छात्राओं में मोबाइल का इस्तेमाल कई गुना बढ़ गया है। भोपाल और जबलपुर के स्कूलों के 90 फीसदी स्टूडेंट्स स्मार्ट फोन चलाना तो जानते हैं, लेकिन उन्हें मोबाइल के सुरक्षा फीचर के बारे में कुछ भी नहीं मालूम है। करीब 60 फीसदी छात्र-छात्राएं सोशल मीडिया का पासवर्ड तक चेंज करना नहीं जानते। एनुअल स्टेटस ऑफ एजुकेशन की रिपोर्ट (असर)- 2023 में यह जानकारी सामने आई है। असर ने भोपाल और जबलपुर के ग्रामीण क्षेत्रों सहित देश के 26 राज्यों में सर्वे के बाद यह निष्कर्ष निकाला। इसमें 14- 18 आयु वर्ग के कुल 34,745 बच्चों से चर्चा की गई।
केवल 33 प्रतिशत लड़कियां ही सोशल मीडिया पर अपने प्लेटफॉर्म प्राइवेट कर पाईं। वहीं ग्रामीण इलाकों में 14 से 18 वर्ष की लड़कियों में केवल 9 प्रतिशत के पास ही मोबाइल फोन है।
14-18 साल के एक तिहाई बच्चे नहीं पढ़ पाए दूसरी का पाठ
सर्वे में ये तथ्य भी सामने आया कि भोपाल के 14-18 साल के 68.8 व जबलपुर के 68 प्रतिशत स्टूडेंट्स ही कक्षा दो का पाठ पढ़ पाए। एक तिहाई नहीं पढ़ पाए। वहीं भोपाल के 38.1 प्रतिशत और जबलपुर के 36.2 प्रतिशत गणित का सवाल हल कर पाए। भोपाल के 50.4 प्रतिशत और जबलपुर के 35.4 प्रतिशत स्टूडेंट्स ही अंग्रेजी का वाक्य पढ़ पाए।
22.9 प्रतिशत छात्र-छात्राओं ने स्कूल के बाद छोड़ी पढ़ाई
रिपोर्ट के अनुसार, जबलपुर और भोपाल के गांवों में स्कूल की पढ़ाई छोड़ने के बाद छात्र और छात्राएं कहीं नामांकन नहीं करवाते हैं। भोपाल में करीब 22.9 फीसदी छात्र-छात्राओं ने स्कूल के बाद पढ़ाई छोड़ दी।
वैसे तो स्कूलों में मोबाइल प्रतिबंधित है, लेकिन कोरोना काल से मोबाइल की उपयोगिता बढ़ी है। इसलिए स्कूलों में मोबाइल संचालन की सामान्य सुरक्षात्मक जानकारी देने की व्यवस्था की जाएगी। -राव उदयप्रताप सिंह, मंत्री, स्कूल शिक्षा विभाग
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