सीएम योगी का पुलिसकर्मियों को तोहफा, मोटरसाइकिल भत्ता 700 से बढ़कर 1000 रुपए प्रतिमाह हुआ

मुख्यमंत्री ने पुलिस स्मृति दिवस पर शहीद पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि देते हुए उनके बलिदान को राष्ट्र के प्रति ऐसा ऋण बताया, जिसे चुकाया नहीं जा सकता। उन्होंने पुलिसकर्मियों की सुविधाएं बढ़ाने के साथ प्रदेश में कानून-व्यवस्था में हुए बदलावों का भी जिक्र किया। योगी ने पिछली सरकारों के कार्यकाल में अपराधियों के प्रभाव और पुलिस पर दबाव होने का आरोप लगाया। उन्होंने 2012 से 2017 के बीच उत्तर प्रदेश में 815 दंगे होने की बात कही और मथुरा के जवाहरबाग कांड का जिक्र करते हुए शहीद पुलिस अधिकारियों को याद किया।
फील्ड ड्यूटी में पुलिसकर्मियों का मोटरसाइकिल भत्ता बढ़ा
सीएम योगी ने उत्तर प्रदेश पुलिस में फील्ड ड्यूटी करने वाले पुलिसकर्मियों के मोटरसाइकिल भत्ते में बढ़ोतरी की घोषणा की। उपनिरीक्षक और निरीक्षक स्तर के पुलिसकर्मियों को अब 700 रुपये के बजाय 1,000 रुपये प्रतिमाह मोटरसाइकिल भत्ता मिलेगा। इसके साथ ही फील्ड ड्यूटी में तैनात आरक्षियों और मुख्य आरक्षियों का भत्ता भी 2,000 रुपये से बढ़ाकर 2,500 रुपये प्रतिमाह करने का ऐलान किया गया। सरकार के इस फैसले का उद्देश्य ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मियों को मिलने वाली सुविधाओं में बढ़ोतरी करना है।
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पीपीएस अधिकारियों का वर्दी भत्ता 6,400 से बढ़ाकर 15 हजार रुपये
पुलिस स्मृति दिवस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने वर्दी भत्ते में भी बढ़ोतरी की घोषणा की। पीपीएस संवर्ग के अधिकारियों का वर्दी भत्ता 6,400 रुपये से बढ़ाकर 15,000 रुपये किया जाएगा। वहीं, फील्ड ड्यूटी में तैनात आरक्षियों और मुख्य आरक्षियों के भत्ते को 2,000 रुपये से बढ़ाकर 2,500 रुपये प्रतिमाह करने की घोषणा की गई। मुख्यमंत्री ने पुलिसकर्मियों की जिम्मेदारियों और ड्यूटी की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सुविधाएं बढ़ाने की बात कही।
'शहीद पुलिसकर्मियों का बलिदान राष्ट्र के लिए अमूल्य'
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस स्मृति दिवस पर शहीद पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि कुछ ऋण ऐसे होते हैं, जिन्हें कभी चुकाया नहीं जा सकता। शहीदों के प्रति राष्ट्र का ऋण भी ऐसा ही है। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा, समाज की शांति और नागरिकों की रक्षा करते हुए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देने वाले पुलिस जवानों को पूरा देश नमन करता है। योगी ने कहा कि शहीदों का साहस और बलिदान हर नागरिक के मन में सम्मान का भाव पैदा करता है और सभी को अपने कर्तव्यों का बोध कराता है।
'एक दौर था, जब अपराधियों पर कार्रवाई करने से डरती थी पुलिस'
योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में पिछली सरकारों के कार्यकाल की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था, जब पुलिस का थानेदार या एसपी किसी अपराधी के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले सोचता था, क्योंकि कार्रवाई होते ही सत्ता के गलियारों से फोन आने लगते थे। मुख्यमंत्री के मुताबिक, कई बार अपराधियों के बजाय पुलिस अधिकारियों के खिलाफ ही कार्रवाई हो जाती थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उस दौर में पुलिस को अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय राजनीतिक दबाव का सामना करना पड़ता था।
पुलिस की स्थिति और अपराधियों के प्रभाव का किया जिक्र
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले थानों में सीलन भरी बैरकें और तपती खपरैल की छतें थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि पीएसी कंपनियों को बंद करने के प्रयास किए जा रहे थे और अपराधी खुलेआम हथियार लहराते थे, जबकि पुलिसकर्मियों के पास जंग लगी रायफलें थीं। योगी ने कहा कि उस समय अपराधियों का समानांतर राज चल रहा था और कानून तमाशबीन बना हुआ था। उन्होंने पुलिस कार्रवाई, एनकाउंटर और जीरो टॉलरेंस की नीति पर सवाल उठाने वालों की आलोचना करते हुए कहा कि माफिया के मारे जाने पर संवेदना जताने वाले लोग शहीद जवानों के परिवारों के प्रति वैसी संवेदना नहीं दिखाते।
जवाहरबाग कांड का किया जिक्र
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 2012 से 2017 के बीच उत्तर प्रदेश में 815 दंगे हुए थे। उन्होंने कहा कि दंगों का असर गरीबों की दुकानों, मजदूरों की दिहाड़ी और बच्चों की पढ़ाई पर पड़ता था। मुख्यमंत्री ने मथुरा के जवाहरबाग कांड का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि कब्जा करने वालों को सत्ता का संरक्षण मिला था। इस घटना में उत्तर प्रदेश पुलिस के एसपी मुकुल द्विवेदी और थानाध्यक्ष संतोष यादव को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। मुख्यमंत्री ने पुलिसकर्मियों के बलिदान को याद करते हुए कानून-व्यवस्था बनाए रखने और नागरिकों की सुरक्षा को सरकार की प्राथमिकता बताया।




















