
नई दिल्ली। शराब नीति घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल और बीआरएस नेता के. कविता को मंगलवार को फिर झटका लगा है। राउज एवेन्यू कोर्ट ने दोनों की न्यायिक हिरासत 7 मई तक बढ़ा दी है। केजरीवाल और के. कविता को उनकी न्यायिक हिरासत पूरी होने के बाद दोनों के अदालत के समक्ष वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश किया गया। साथ ही ED ने बताया कि वह जल्द ही के. कविता मामले में आरोपपत्र दायर करेगा। इसके पहले केजरीवाल की कस्टडी 1 अप्रैल से 15 अप्रैल, फिर उसके बाद 23 अप्रैल तक बढ़ाई गई थी।
Delhi's Rouse Avenue Court extends Judicial Custody till May 7 of Delhi CM Arvind Kejriwal and BRS Leader K Kavitha and one Chanpreet Singh in ED case related to the Excise Policy matter
All the accused were produced virtually before the court from Tihar.
— ANI (@ANI) April 23, 2024
अब 7 मई को कोर्ट में होंगे पेश
के. कविता के मामले के बाद ED ने अरविंद केजरीवाल और चरप्रीत सिंह के मामले में भी न्यायिक हिरासत बढ़ाने की मांग की, जिसके बाद अदालत ने तीनों मामलों में न्यायिक हिरासत को बढ़ाकर 7 मई कर दिया। अब सभी को 7 मई को दोपहर 2 बजे कोर्ट में पेश किया जाएगा।
तिहाड़ जेल में केजरीवाल को पहली बार दी इंसुलिन
ईडी की गिरफ्तारी के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को तिहाड़ जेल में पहली बार इंसुलिन दी गई। आम आदमी पार्टी के सूत्रों का दावा है कि केजरीवाल का शुगर लेवल 320 तक पहुंच गया था।
आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली सरकार में मंत्री सौरभ भारद्वाज ने एक्स पर पोस्ट शेयर कर कहा- हनुमान जन्मोत्सव पर खुशखबरी, खबर आ रही है अंततः जेल प्रशासन ने मुख्यमंत्री को बढ़ती हुई सुगर के लिए इंसुलिन दी। आज देश की राजधानी के मुख्यमंत्री को एक इंसुलिन के लिए भी कोर्ट जाना पड़ रहा है। भाजपा और केंद्र सरकार के अधीन अफसर कहते हैं सभी क़ैदी एक समान हैं। क्या इंसुलिन के लिये सभी तिहाड़ के क़ैदी कोर्ट जाते हैं ? क्या सभी कैदियों को बीमारी की दवाई के लिए कोर्ट जाना पड़ता है ? क्या सभी कैदियों को इंसुलिन के लिये एक हफ्ता TV और अखबार में बहस करनी पड़ती है ?
21 मार्च को गिरफ्तार हुए थे केजरीवाल
ईडी ने लगभग दो घंटे की पूछताछ के बाद अरविंद केजरीवाल को 21 मार्च को उनके आधिकारिक आवास से गिरफ्तार किया था। इसके बाद उन्हें शुक्रवार (22 मार्च) को राऊज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया और पूछताछ के लिए 10 दिनों की रिमांड मांगी, लेकिन कोर्ट ने छह दिन की रिमांड दी। 28 मार्च को केजरीवाल की रिमांड अवधि खत्म हुई, जो बाद में 1 अप्रैल तक बढ़ा दी गई। कोर्ट ने केजरीवाल को 1 अप्रैल से 15 अप्रैल तक के लिए ज्यूडिशियल कस्टडी में भेजा था। जिसके बाद फिर से राउज एवेन्यू कोर्ट ने केजरीवाल की न्यायिक हिरासत 23 अप्रैल तक बढ़ा दी। केजरीवाल को तिहाड़ जेल में 2 नंबर बैरक में रखा गया है।
HC ने रिमांड को सही ठहराया
दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार (9 अप्रैल) को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को जमानत देने वाली याचिका खारिज कर दी और शराब नीति मामले में केजरीवाल की गिरफ्तारी-रिमांड को सही ठहराया। हाईकोर्ट ने कहा- ED ने हमारे सामने पर्याप्त सबूत पेश किए। अपनी याचिका में केजरीवाल ने कहा था कि उनकी गिरफ्तारी PMLA (मनी लॉन्ड्रिंग कानून) की धारा-19 का उल्लंघन है। जिस पर जस्टिस स्वर्ण कान्त शर्मा ने कहा कि ईडी द्वारा जुटाए गए तथ्यों से पता चलता है कि अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली की शराब नीति बनाने में आरोपियों के साथ मिलकर साजिश रची और इससे मिले पैसों का इस्तेमाल गोवा इलेक्शन में किया।
हालांकि, 10 अप्रैल को अरविंद केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है।
जेल से जारी कर चुके दो आदेश
केजरीवाल अब तक जेल से दो आदेश भी जारी कर चुके हैं।
पहला आदेश : केजरीवाल ने पहला सरकारी आदेश 24 मार्च को जल मंत्रालय के नाम जारी किया था। उन्होंने जल मंत्री आतिशी को निर्देश दिया था कि, दिल्ली में जहां पानी की कमी है, वहां टैंकरों का इंतजाम करें।
दूसरा आदेश : केजरीवाल ने दूसरा सरकारी आदेश 26 मार्च को स्वास्थ्य मंत्रालय के नाम जारी किया था। उन्होंने निर्देश दिए थे कि, मोहल्ला क्लिनिक में गरीबों के लिए दवाओं की कमी नहीं होनी चाहिए। लोगों को मुफ्त जांच और दवाई मुहैया कराई जाए।
पहली बार किसी सीएम की हुई गिरफ्तारी
यह पहला ऐसा मामला है जब किसी मुख्यमंत्री को पद पर रहते हुए ही गिरफ्तार कर लिया गया है। इससे पहले जो भी सीएम किसी आरोप के कारण जांच या फिर गिरफ्तारी के दायरे में आए थे, उन्होंने अपने पद से पहले ही इस्तीफा दे दिया था। इससे पहले झारखंड के पूर्व CM हेमंत सोरेन को ED ने गिरफ्तार किया था। सोरेन ने ED की हिरासत में राजभवन जाकर इस्तीफा दे दिया था। ऐसे में अब दिल्ली में आम आदमी पार्टी (आप) सरकार को लेकर की सवाल खड़े हो रहे हैं।
क्या है पूरा मामला ?
दिल्ली में केजरीवाल की सरकार में डिप्टी सीएम रहे मनीष सिसोदिया ने 22 मार्च 2021 को नई शराब नीति का ऐलान किया था। 17 नवंबर 2021 को नई शराब नीति यानी एक्साइज पॉलिसी 2021-22 लागू कर दी गई। नई शराब नीति लागू करने के बाद सरकार शराब के कारोबार से बाहर आ गई और शराब की पूरी दुकानें निजी हाथों में चली गई। नई नीति लाने के पीछे सरकार का तर्क था कि इससे माफिया राज खत्म होगा और सरकार का रेवेन्यू में बढ़ेगा। नई नीति से रेवेन्यू में 1500-2000 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी की उम्मीद जताई गई थी।
नई पॉलिसी में कहा गया था कि दिल्ली में शराब की कुल दुकानें पहले की तरह 850 ही रहेंगी। हालांकि, नई नीति शुरू से ही विवादों में रही। जब बवाल ज्यादा बढ़ गया, तब 28 जुलाई 2022 को सरकार ने नई शराब नीति रद्द कर फिर पुरानी पॉलिसी लागू कर दी। मामले में सीबीआई को जांच ट्रांसफर दी गई। मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा एंगल आने पर इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय की एंट्री हो गई। उसके बाद से AAP के कई सीनियर नेता और उनके करीबी सहयोगी जांच एजेंसी के निशाने पर आ गए।
सिसोदिया जेल में, संजय सिंह जमानत पर
शराब नीति केस में केजरीवाल से पहले AAP नेता मनीष सिसोदिया और संजय सिंह की भी गिरफ्तारी हुई थी। सिसोदिया 26 फरवरी 2023 से जेल में बंद हैं। वहीं संजय सिंह को ED ने 4 अक्टूबर 2023 को गिरफ्तार किया था। हालांकि, 2 अप्रैल 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी थी।
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