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27 साल बाद आ जाएगा जल संकट : सूख जाएंगी गंगा, सिंधु और ब्रह्मपुत्र नदियां; ग्लोबल वॉर्मिंग पर UN की डराने वाली रिपोर्ट

नई दिल्ली। संयुक्‍त राष्‍ट्र महासच‍िव ने आने वाले दशकों में भारत की नदियों को ग्‍लोबल वार्म‍िंग से बड़ा नुकसान होने की चेतावनी दी है। उनका कहना है कि, हिमालय की प्रमुख नदियां- सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र का जलस्तर बहुत तेजी से कम होने वाला है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण जिस तरह से ग्लेशियर और बर्फ की पर्तें पिघल रही हैं वो चिंता का विषय है।

धरती पर जीवन के लिए जरूरी है ग्लेशियर

यूएन महासच‍िव एंटोनियो गुटेरेस ने बुधवार को इंटरनेशनल ईयर ऑफ ग्लेशियर प्रिजर्वेशन पर आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि- ग्लेशियर धरती पर जीवन के लिए बहुत जरूरी है। दुनिया के 10 प्रतिशत हिस्से में ग्लेशियर है, यह दुनिया के लिए जल का एक बड़ा स्रोत भी है। लेकिन ग्लोबल वॉर्मिंग की वजह से ये तेजी से पिघल रहे हैं।

साल 2050 तक सूख जाएंगी नदियां

गुटेरेस ने कहा कि, अंटार्कटिका हर साल 1500 करोड़ टन बर्फ खो रहा है। ग्रीनलैंड 2700 करोड़ टन बर्फ हर साल खो रहा है। इसके बाद सबसे ज्यादा ग्लेशियर हिमालय पर हैं, जो अब तेजी से पिघल रहे हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि, आने वाले कुछ दशकों में सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र जैसी अहम हिमालयी नदियों के जलस्तर और बहाव में कमी देखने को मिली सकती है। यह नद‍ियां भारत के ल‍िए खास और बेहद अहम मानी जाती हैं।

एशिया की 10 प्रमुख नदियां हिमालय क्षेत्र से निकलती हैं, जो इसके जलसम्भर में रहने वाले 1.3 अरब लोगों को जल की आपूर्ति करती हैं। साल 2050 तक इसकी वजह से 170 से 240 करोड़ शहरी लोगों को पानी मिलना बेहद कम हो जाएगा।

पाकिस्तान-चीन में बाढ़ की स्थिती

दुनिया पहले ही देख चुकी है कि कैसे हिमालय पर बर्फ के पिघलने से पाकिस्तान में बाढ़ की स्थिति देखी गई। वहीं समुद्र का बढ़ता स्तर और खारे पानी का प्रवेश इन विशाल ‘डेल्टा’ के बड़े हिस्से को नष्ट कर देगा। अगर तेजी से ग्लेशियर पिघला तो पाकिस्तान और चीन में बाढ़ की स्थिति भी आ सकती है।

गुटेरेस ने विश्व मौसम विज्ञान संगठन के आंकड़ों का हवाला देते हुए यह भी चेतावनी दी कि वैश्विक औसत समुद्र का स्तर पिछले 3,000 सालों में किसी भी पिछली सदी की तुलना में 1900 के बाद से तेजी से बढ़ा है।

जल सम्मेलन की कौन कर रहा मेजबानी

संयुक्त राष्ट्र 2023 का आयोजन जल सम्मेलन के रूप में किया गया। जल सम्मेलन में औपचारिक रूप से जल व स्वच्छता पर कार्रवाई के लिए संयुक्त राष्ट्र के एक दशक (2018-2028) में किए जाने वाले कार्यों की मध्यावधि समीक्षा की गई। ताजिकिस्तान और नीदरलैंड की सरकारों द्वारा संयुक्त राष्ट्र 2023 जल सम्मेलन की सह-मेजबानी की जा रही है।

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