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अमेरिका के साथ हथियारों की एक डील ने बढ़ाई चीन की चिंता, जानिए क्यों चर्चा में है सिग सॉ असॉल्ट राइफल्स

नई दिल्ली। लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर चीन के साथ चल रहे सैन्य टकराव के बाद भारत राइफल्स की झड़ी लगाने वाला है। इसके लिए भारत ने अमेरिका से 73000 सिग सॉ (SiG-716) असॉल्ट राइफल्स का सौदा किया है। इस डील को भारत ने 837 करोड़ रुपए में साइन किया है। इससे पहले 2019 में भी भारत ने अमेरिका से 647 करोड़ की कुल कीमत के 72400 सिग-716 राइफल्स का सौदा किया था।

इन राइफल्स को चीन और पाकिस्तान के सीमा पर तैनात पैदल सेना बटालियन को दिया जाएगा। इस सौदे के बाद भारतीय सेन के पास लगभग डेढ़ लाख सिग-716 राइफल्स हो जाएंगी। इस सौदे को डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) ने दिसंबर 2023 में मंजूरी दी थी, जिसकी अगुवाई रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की थी।

क्या है सिग-716 राइफल्स की खासियत

  1. सिग सॉ असॉल्ट राइफल्स (SiG-716) की लंबाई 34.39 इंच है और यह वजन में हल्की होगी। इसका वजन लगभग 3.58 किलो है।
  2. इसका मारक रेंज 500 मीटर है।
  3. 7.62×51 मिमी कैलिबर की गोलियों से होगी लैस।
  4. एक मिनट में 685 राउंड फायरिंग की जा सकती है।
  5. साथ ही एक मैगजीन में 20 गोलियां एक साथ आती हैं।
  6. इसमें 6 अलग अलग टेलीस्कोपिक पोजीशन है।

रूस ने राइफल्स डील में की देरी, इसलिए अमेरिका को दिया ऑर्डर

सेना में बढ़ते राइफल्स की जरूरतों को लेकर भारत ने 2018-19 में रूस से रूसी राइफल AK-203 का सौदा किया था, लेकिन जल्द डिलीवरी को लेकर रूस असमर्थ रहा। इसके एवज में ही 2019 में अमेरिका से पहली सिग सॉ असॉल्ट राइफल्स का सौदा किया गया था। इस सिग-716 राइफल्स के जरिए ही पुरानी राइफल्स इंसास को रिप्लेस किया जाएगा। पहली खेप में आई सिग-716 की 72400 राइफल्स में से 66400 सेना को, 2000 नेवी को और 4000 एयरफोर्स को सौंपी गई थी।

सिग-716 में ग्लिच की खबरों को सेना ने किया था खारिज

मीडिया रिपोर्टस में इससे पहले ऐसी खबरें आई थी कि सिग-716 राइफल्स में ग्लिच आ रही हैं। इस रिपोर्ट को सेना ने नकारते हुए कहा था, अमेरिका की यह राइफल्स अधिक घातक, हाई रिकॉल और प्रभावी लंबी रेंज की हैं जो कि पहले से इस्तेमाल में चली आ रही इंसास (5.56×51 मिमी) या AK-47 राइफल्स की तुलना में बेहतर हैं।

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