
प्रवीण श्रीवास्तव/भोपाल। भीषण गर्मी में इन दिनों राजधानी समेत प्रदेश के कई शहरों में पारा 40 डिग्री के पार हो गया है। इसका असर दिमाग पर भी हो रहा है। तेज गर्मी में लोग गुस्से और चिड़चिड़ेपन का शिकार हो रहे हैं। दरअसल गर्मी के कारण हीट एंजायटी के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। हमीदिया और जेपी अस्पताल की ओपीडी में हर रोज 55 से 60 मरीज ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं, जिनमें गर्मी की वजह से तनाव देने वाले हार्मोन बढ़ गए हैं। इन मरीजों को मानसिक रोग विभाग में भेजा जा रहा है। आम दिनों में ऐसे मरीजों की संख्या 8 से 10 ही रहती थी। जेपी अस्पताल के क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. अजय शर्मा बताते हैं कि तापमान और गुस्से का सीधा असर होता है। शरीर गर्म होने या फिर लगातार पसीना निकलने से बेचैनी होती है। बढ़ते तापमान से दिमाग के न्यूरो ट्रांसमीटर प्रभावित होते हैं। इससे अनिद्रा, थकान, गुस्सा और चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है। गर्मी बढ़ने से स्ट्रेस हार्माेन (कॉर्टिसोल) का लेवल बढ़ जाता है। कई बार आत्महत्या के खयाल भी आने लगते हैं।
क्या है हीट एंजायटी का मुख्य कारण
हीट एंजायटी का बड़ा कारण है डिहाइड्रेशन। जब शरीर में पानी की कमी होती है तो पसीना नहीं बनता, जिससे शरीर ठंडा नहीं हो पाता है।
इस तरह से बचें
- कमजोरी, चक्कर आना, सिरदर्द, बेचैनी और हार्ट रेट बढ़ने पर डॉक्टर से मिलें।
- हल्के, ढीले-ढाले कपड़े पहनें
- तेज धूप में निकलने से बचें। हर 20 से 30 मिनट में पानी पीते रहें।
यह एक डिसऑर्डर है। न्यूरो ट्रांसमीटर के लिए 20 से 28 डिग्री तक तापमान अनुकूल होता है। गर्मी बढ़ने से दिल पर दबाव बढ़ता है तो लोग अधिक तनाव, एंजायटी और गुस्से की समस्या से जूझते हैं। सोचने-समझने की शक्ति प्रभावित होने लगती है। – डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी, मनोचिकित्सक