ताजा खबरभोपाल

टीथ व्हाइटनिंग टूथपेस्ट से घिसते हैं दांतों के इनेमल, डेंटिस्ट से ही लें सही ट्रीटमेंट

डेंटिस्ट का सुझाव- सफेद करने के चक्कर में कमजोर न करें दांतों की परत

प्रीति जैन 􀁺 I am Bhopal सोशल मीडिया पर इन दिनों टूथपेस्ट को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रहीं हैं, जिसमें से एक है, टीथ व्हाइटिंग वाला टूथपेस्ट यूज करना सही है या नहीं। मार्केट में ऐसी कई कंपनियां है जो कि दांतों को सफेद करने का दावा करती है, लेकिन डेंटिस्ट्स इस बात से सहमत नजर नहीं आते, उनका कहना है कि जिस तरह हर इंसान की स्किन के रंग में फर्क होता है, उसी तरह दांतों के शेड्स में भी अंतर होता है। किसी के भी दांत हमेशा के लिए एकदम सफेद नहीं हो सकते लेकिन इन्हें एक या दो शेड लाइटर किया जा सकता है लेकिन टूथपेस्ट से नहीं क्योंकि इससे दांतों की ऊपरी परत यानी इनेमल घिस जाता है। यदि किसी ओकेजन के लिए टीथ व्हाइटनिंग करना है तो डेंटिस्ट से लेजर टेक्निक से ऐसा करा सकते हैं।

दांतों की सतह पर आता है खुरदरापन

क्लिनिकल ओरल इन्वेस्टिगेशन जर्नल के अनुसार, रोजाना व्हाइटनिंग टूथपेस्ट करने से दांतों का रंग एक या दो शेड हल्का हो सकता है, जिससे दांतों को नुकसान पहुंच सकता है। दांतों की सतह पर खुरदरापन आ सकता है। इसके अलावा अगर दांतों के इनेमल को नुकसान पहुंचता है, तो इससे दांतों में सड़न लग सकती है। व्हाइटनिंग टूथपेस्ट में सिलिकॉन, कैल्शियम कार्बोनेट, बेकिंग सोडा और हाइड्रोजन पेरोक्साइड जैसे जरूरी पोषक तत्व की उच्च मात्री होती है। जिन लोगों के दांतों की इनेमल की परत पतली होती है, उन्हें इन ब्लीचिंग एजेंट से नुकसान पहुंच सकता है। दरअसल, इनेमल दांतों पर मौजूद एक कठोर पदार्थ होता है, जो दांतों की रक्षा करता है। इस ब्लीचिंग एजेंट से दांतों का पीलापन और दाग-धब्बे तो हट जाएंगे, लेकिन साथ ही प्राकृतिक सफेदी भी कम हो जाएगी।

दांत घिसने के आते हैं मामले

मेरे पास कई ऐसे केस आते हैं, जिसमें लोगों के दांत घिस जाते हैं, क्योंकि वे देसी मंजन या व्हाइटनिंग टाइप पेस्ट इस्तेमाल करते हैं। यदि टूथपेस्ट में दरदरापन है तो दांतों और मसूड़ों के बीच की जगह को घिस देगा जिससे सेंसिटिविटी होने लगती है और ठंडा व गर्म महसूस होने लगता है। अपने दांतों की जांच के बाद डेंटिस्ट से एक सही टूथपेस्ट रिकमंड करने को कहें। -डॉ. हरप्रीत सहगल, डेंटिस्ट

लेजर से करते हैं टीथ व्हाइटनिंग

यदि किसी शादी या फंक्शन की वजह से दांतों का शेड ठीक करना चाहते हैं तो डेंटिस्ट की मदद लें क्योंकि अब लेजर से टीथ व्हाइटनिंग होती है जिससे दांतों के इनेमल को नुकसान नहीं पहुंचता। इसे साल में दो बार करा सकते हैं लेकिन इससे दांत बिल्कुल सफेद नहीं बल्कि दांतों के दाग-धब्बे हट जाते हैं और दांत का पीलापन कम हो जाता है। -डॉ. प्रतिमा वाजपेयी, डेंटिस्ट 

संबंधित खबरें...

Back to top button