इंदौरमध्य प्रदेश

इंदौर: 24 एडवाइजरी कंपनियों के खिलाफ केस दर्ज, 101 पीड़ितों से ठगे 10 करोड़ रुपए

इंदौर में पुलिस ने धोखाधड़ी करने वाली 24 एडवाइजरी कंपनियों के खिलाफ केस दर्ज किया है। दरअसल, पिछले 2 सालों से ये कंपनियां शेयर बाजार में निवेश करने का झांसा देकर लोगों से ठगी कर रहे थे। इस मामले में पुलिस ने संचालक सहित 105 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

6 करोड़ 68 लाख रुपए दिलाए वापस

इन कंपनियों के संचालकों ने 101 पीड़ितों से 10 करोड़ रुपए ठगे थे। इनमें से पुलिस ने 6 करोड़ 68 लाख रुपए पीड़ितों को वापस दिला दिए। जानकारी के मुताबिक अब तक की धोखाधड़ी में यह सबसे बड़ी रिकवरी है।

एसआईटी बनाकर पकड़ा रैकेट

पुलिस जांच में पता चला है कि आरोपी इंदौर में बैठकर गुजरात, बेंगलुरु, राजस्थान, अहमदाबाद, महाराष्ट्र, चेन्नई, कोलकाता में लोगों को ठगते थे। कुछ आरोपियों ने तो ऑनलाइन एजुकेशन और काउंसलिंग सेंटर के बोर्ड लगाकर एडवाइजरी कंपनियां खोल रखी थीं। वहीं जब पीड़ितों ने इसकी शिकायत पुलिस में की तो अधिकारियों ने एसआईटी बनाकर इनका रैकेट धवस्त किया।

धोखाधड़ी के मामलों में दिखी गिरावट

एसपी आशुतोष बागरी के मुताबिक आरोपियों के बैंक खातों से लेकर अन्य जानकारियां भी जुटाई जा रहीं हैं। इसके अलावा उनके परिचितों, परिवार वालों और रिश्तेदारों से भी पूछताछ की जा रही है। एसपी की मानें तो इन आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद से धोखाधड़ी की शिकायतों में काफी कमी आई है।

1 हजार से ज्यादा फर्जी सिम जब्त

पुलिस के अनुसार आरोपियों के पास से 500 से ज्यादा मोबाइल फोन, 1 हजार से ज्यादा फर्जी सिम, 200 से ज्यादा फर्जी बैंक खाते मिले, जो अनजान लोगों के दस्तावेजों से खुलवाए गए थे। कई कंपनियों ने तो यह भी कबूल किया है कि वो डेटा चोरी कर लोगों को सीधे टारगेट करते थे। वहीं अब पुलिस इनके डेटा चोरी करने वाले सोर्स का भी पता लगा रही है।

विजय नगर इलाका बना गढ़

सेबी के अधिकारियों के मुताबिक, विजय नगर में ही कंपनियां ऑफिस खोलकर फर्जीवाड़े कर रही थीं। पुलिस ने कुछ समय पहले ही यहां से पाकिस्तानी मूल के नागरिक विवेक पेशवानी को पकड़ा था। वह फर्जी कंपनी चला रहा था। मुंबई-पुणे, बंगाल, राजस्थान और महाराष्ट्र की पुलिस भी यहां दबिश दे चुकी।

‘जामताड़ा मॉडल’ को अपना कर करते थे फर्जीवाड़े

सभी जांच एजेंसियों की रिपोर्ट में यह स्पष्ट है कि इन एडवाइजरी कंपनियों के संचालक ‘जामताड़ा मॉडल’ को अपना कर फर्जीवाड़े करते थे। वेबसाइट पर झूठी जानकारियां देकर फर्जी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट और फर्जी एड्रेस डालते थे। ये लोग ज्यादातर दूसरे शहरों के लोगों को ही टारगेट करते थे। जिससे पुलिस इन तक पहुंच ना पाए।

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