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झारखंड शराब घोटाला : विधानसभा चुनाव के बीच ED की कार्रवाई, IAS विनय चौबे समेत कई लोगों के ठिकानों पर छापेमारी

रांची। झारखंड विधानसभा चुनाव के बीच ईडी ने रांची में छापेमार कार्रवाई की है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने झारखंड के सीनियर IAS अधिकारी विनय चौबे, उत्पाद विभाग के संयुक्त सचिव गजेंद्र सिंह समेत अन्य करीबी रिश्तेदार और संबंधित अधिकारियों के सीए के ठिकानों पर छापेमारी की है। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ शराब सिंडिकेट घोटाले से जुड़ी जगहों पर छापेमारी की खबर है। ईडी की छापेमारी किन-किन लोकेशन पर हो रही है, यह स्पष्ट नहीं हो सका है। बताया जा रहा है कि, ये कार्रवाई शराब घोटाले मामले में की गई है।

अगस्त 2023 में 32 ठिकानों पर की थी छापेमारी

इससे पहले भी शराब घोटाला मामले में ईडी कार्रवाई कर चुकी है। ईडी ने 23 अगस्त 2023 को रांची, देवघर, दुमका, कोलकाता के 32 ठिकानों पर छापेमारी की थी। इसमें राज्य के वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव, उनके बेटे रोहित उरांव, शराब कारोबारी योगेंद्र तिवारी और इनसे जुड़े 32 लोगों के यहां ईडी ने दबिश दी थी।

जिसके बाद योगेंद्र तिवारी को गिरफ्तार कर लिया गया था। ईडी ने उनके खिलाफ आरोप पत्र भी दायर किया था, जिसमें उन्होंने बालू और जमीन कारोबार की कमाई को शराब के कारोबार में लगाने की बात कही थी।

क्या है पूरा मामला

इस मामले में छत्तीसगढ़ पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ईओडब्ल्यू ने पहले ही उत्पाद विभाग के तत्कालीन सचिव विनय कुमार चौबे और संयुक्त सचिव गजेंद्र सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली थी। रांची के विकास कुमार ने प्राथमिकी दर्ज करने के लिए आवेदन दिया था। जिसके बाद रायपुर में एफआईआर दर्ज की गई। आवेदन में कहा गया कि, शराब घोटाले की पूरी साजिश आबकारी नीति में बदलाव के लिए रायपुर में रची गई थी।

छत्तीसगढ़ शराब घोटाले के तार झारखंड से भी जुड़ गए हैं। छत्तीसगढ़ एसीबी की ओर से दर्ज एफआईआर में झारखंड के तत्कालीन उत्पाद सचिव आईएएस विनय चौबे और उत्पाद विभाग के संयुक्त आयुक्त गजेंद्र सिंह को आरोपी बनाया गया है। एफआईआर में कहा गया है कि छत्तीसगढ़ में शराब के जरिए मोटी कमाई करने वाले सिंडिकेट से जुड़े आईएएस IAS अनिल टुनेजा, अनवर ढबेर ने जनवरी 2022 में चौबे से मुलाकात की और झारखंड में शराब की बिक्री के लिए नियम बनाए। छत्तीसगढ़ राज्य विपणन निगम के एमडी अरुणपति त्रिपाठी को सलाहकार बनाया गया। त्रिपाठी को लगभग 1.25 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया था। एफआईआर के मुताबिक, सिंडिकेट को फायदा पहुंचाने के लिए टेंडर में 100 करोड़ रुपए के टर्नओवर की शर्त डाली गई थी। इससे 2022-23 में राज्य सरकार को राजस्व का नुकसान हुआ।

मंत्री आलमगीर के नौकर के घर मिला था करोड़ों का कैश

इससे पहले मई में झारखंड के पूर्व मंत्री के करीबी के घर पर ईडी ने छापेमारी की थी, जिसमें करोड़ों रुपए कैश बरामद किए गए थे। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मई में रांची में कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम के निजी सचिव संजीव लाल के नौकर के घर ईडी ने भारी नकदी जब्त की थी। इस मामले में कुल 6 जगहों पर छापेमारी हुई थी और 35.23 करोड़ रुपए का कैश बरामद किया गया था। ईडी ने आलमगीर आलम को उनके सहायक से जुड़े परिसर से नकदी बरामद किए जाने के बाद टेंडर कमीशन घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में  15 मई, 2024 को गिरफ्तार किया था।

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