
Delhi Drugs Case: दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने शुक्रवार (11 अक्टूबर) को बड़ी कामयाबी हासिल की है। अब ड्रग्स मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) करेगी। केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी ने 7600 करोड़ रुपए की ड्रग बरामदगी मामले में पीएमएलए के तहत मामला दर्ज किया है। इसके बाद दिल्ली एनसीआर और मुंबई में कई जगहों पर छापेमारी की गई।
ईडी की टीम फिलहाल आरोपी और आरटीआई सेल कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष तुषार गोयल के वसंत विहार स्थित घर, उनके और उनकी पत्नी के राजौरी गार्डन स्थित घर, आरोपी हिमांशु के प्रेम नगर स्थित घर, इसके अलावा भरत कुमार के मुंबई के नालासोपारा स्थित घर, दिल्ली के झंडेवालान में तुषार बुक पब्लिकेशन और गुरुग्राम में एबीएन बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड के दफ्तर पर भी छापेमारी की जा रही है।
10 दिनों में 7600 करोड़ की ड्रग्स बरामद
- दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने कल ही रमेश नगर इलाके में रेड कर 2 हजार करोड़ रुपए की और ड्रग्स बरामद की थी।
- इससे पहले 1 अक्टूबर को स्पेशल सेल ने महिपालपुर में छापेमारी कर 5600 करोड़ रुपए की ड्रग्स बरामद की थी।
- दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल अब तक इस मामले में सात आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है और उनके ठिकानों से 7600 करोड़ रुपए की ड्रग्स बरामद कर चुकी है।
दिल्ली पुलिस ने लुकआउट सर्कुलर किया जारी
- 7000 करोड़ रुपए से ज्यादा की ड्रग्स बरामदगी मामले में जांच कर रही दिल्ली पुलिस ने 6 लोगों के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर भी जारी किया है। जिसमें भारतीय मूल का एक ब्रिटिश नागरिक भी शामिल है, जो पश्चिमी दिल्ली से 208 किलोग्राम ड्रग्स की ताजा बरामदगी से पहले देश छोड़कर भाग गया था।
- पुलिस की मानें तो ब्रिटिश नागरिक सविंदर सिंह पिछले महीने 208 किलोग्राम की खेप और डिलीवरी की देखरेख के लिए भारत आए थे, जिसको लेकर संदेह है कि इसे दक्षिण अमेरिकी देशों से लाया गया था।
- सूत्रों का कहना है कि सिंडिकेट के पहले चार सदस्यों की गर्लफ्रेंड के तुरंत बाद सा आलमी सिंह ने यूके ब्लास्ट से पहले दिल्ली में तीन अलग-अलग जगहों पर करीब 25 दिन तक कमाई की थी।
नमकीन के पैकेट के अंदर कोकीन
- गिल और तुषार गोयल को गिरफ्तार कर लिया गया है और वीरेंद्र बसोया और सविंदर की तलाश की जा रही है। दोनों विदेश में मौजूद हैं।
- इसके अलावा रमेश नगर के जिस गोदाम में सविंदर ने 204 किलो ड्रग्स रखी थी, उसके मालिक और प्रॉपर्टी डीलर से भी पुलिस ने पूछताछ की है।
- इस गोदाम को 5000 रुपये में किराये पर लिया गया था और कोकीन को स्नैक्स के पैकेट में छिपाकर डिब्बों में पैक करके रखा जाता था।
- पुलिस सूत्रों के मुताबिक, एक सिंडिकेट दूसरे से बात नहीं करता और सोशल मीडिया पर कोड वर्ड के जरिए एक-दूसरे से संपर्क करता है।
- इसके अलावा थ्रेमा ऐप का इस्तेमाल ड्रग डील के लिए किया जाता है। सौदे के दौरान कटे-फटे नोटों का इस्तेमाल यह पुष्टि करने के लिए किया गया था कि डिलीवरी सुरक्षित हाथों में थी और कोई जाल नहीं था।
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