
इंदौर। देशभर में ‘डिजिटल अरेस्ट’ की घटनाओं में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। पुलिस लगातार एडवाइजरी जारी कर रही है, लेकिन इसके बावजूद लोग ठगी का शिकार बन रहे हैं। इंदौर में एक ऐसी ही घटना सामने आई, जहां विजयनगर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई कर एक 35 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर को ठगी का शिकार होने से बचा लिया। फिलहाल, पूरे मामले में अब पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर जांच पड़ताल शुरू कर दी है।
परिजनों ने पुलिस को दी सूचना
डीसीपी अभिनय विश्वकर्मा ने बताया कि सॉफ्टवेयर कंपनी के कर्मचारी धर्मेंद्र शर्मा के परिजनों ने विजय नगर पुलिस को बुधवार को सूचना दी थी कि वह घर से गायब है और फोन भी नहीं उठा रहा है। पुलिस ने धर्मेंद्र शर्मा का मोबाइल नंबर ट्रैक किया और उनकी लोकेशन एक होटल में पाई गई। जब हम सुरागों के आधार पर एक होटल के कमरे में पहुंचे, तो यह पेशेवर अपने मोबाइल फोन पर वीडियो कॉल के जरिये एक ठग से बात कर रहा था। इस ठग ने वर्दी पहन कर पुलिस अधिकारी जैसा हुलिया बना रखा था।”
ठगों ने बनाया ‘डिजिटल हाउस अरेस्ट’ का शिकार
जब पुलिस ने होटल फ्रेंड्स इन के 109 नंबर रूम में उन्हें ढूंढा, तो धर्मेंद्र घबराए हुए मिले। पूछताछ में उन्होंने बताया कि दोपहर करीब 1:30 बजे उन्हें मुंबई से कॉल आई थी। कॉल करने वाले ने खुद को पुलिस अधिकारी बताया और कहा कि उनका नाम एक कानूनी मामले में शामिल है। इसके बाद उन्हें डराया-धमकाया गया और लाखों रुपये की मांग की गई। ठगों ने उन्हें होटल के कमरे में बंद कर “डिजिटल हाउस अरेस्ट” का शिकार बना दिया। पीड़ित को यह यकीन दिलाया गया कि वह कानूनी परेशानी में हैं और इसे हल करने के लिए मुंबई पुलिस से संपर्क करना होगा।
पुलिस ने ठगी से बचाया
विजयनगर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर न सिर्फ पीड़ित को ठगी से बचाया, बल्कि उन्हें समझाया कि डिजिटल माध्यम से कोई भी कानूनी कार्रवाई वैध नहीं होती। डीसीपी अभिनव विश्वकर्मा ने इस घटना पर कहा कि लोग साइबर अपराधियों की नई-नई तकनीकों से सतर्क रहें और इस तरह की कॉल्स पर विश्वास न करें। विश्वकर्मा ने बताया,‘‘पुलिस के पहुंचने तक यह व्यक्ति डिजिटल अरेस्ट के नाम पर करीब चार घंटे तक होटल के कमरे में बंद रहा।”
बैंक खाते में थे करीब 26 लाख रुपए
विजय नगर थाने के प्रभारी चंद्रकांत पटेल ने बताया कि पीड़ित व्यक्ति के बैंक खाते में 26 लाख रुपए जमा हैं और अगर पुलिस वक्त रहते उसके पास नहीं पहुंचती, तो वह “डिजिटल अरेस्ट” की आड़ में ठगी का शिकार होकर यह रकम गंवा सकता था। ”
डीसीपी अभिनय विश्वकर्मा ने कहा कि डिजिटल हाउस अरेस्ट की घटनाएं बढ़ रही हैं। हम लोगों से अपील करते हैं कि इस तरह की किसी भी संदिग्ध कॉल पर तुरंत पुलिस को सूचित करें। हमारी त्वरित कार्रवाई से धर्मेंद्र शर्मा को बचाया गया और बड़ी ठगी टाली गई।
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