
मुंबई। मशहूर लीलावती हॉस्पिटल से जुड़ा एक चौंकाने वाला घोटाला सामने आया है। मौजूदा ट्रस्टी ने अस्पताल के पूर्व ट्रस्टियों पर 1500 करोड़ रुपए की हेराफेरी करने का गंभीर आरोप लगाया है। सिर्फ यही नहीं, अस्पताल में काला जादू किए जाने का भी दावा किया गया है। हॉस्पिटल के मौजूदा मैनेजमेंट के अनुसार, अस्पताल परिसर की खुदाई के दौरान मानव हड्डियों, बाल और चावल से भरे 8 कलश मिले हैं।
यह मामला तब प्रकाश में आया जब लीलावती हॉस्पिटल के मैनेजमेंट ने फाइनेंशियल ऑडिट करवाई, जिसमें बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा हुआ। इसके बाद ट्रस्ट ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और बांद्रा मजिस्ट्रेट कोर्ट के आदेश के बाद पूर्व ट्रस्टियों के खिलाफ FIR दर्ज करवाई गई।
पूर्व ट्रस्टियों पर लगे गंभीर आरोप
लीलावती हॉस्पिटल का संचालन ‘लीलावती कीर्तिलाल मेहता मेडिकल ट्रस्ट’ द्वारा किया जाता है। ट्रस्ट के मौजूदा ट्रस्टी प्रशांत मेहता ने पूर्व ट्रस्टियों पर धोखाधड़ी और हेराफेरी का आरोप लगाया है। आरोप है कि पूर्व ट्रस्टियों ने अस्पताल की संपत्ति और धन का गलत इस्तेमाल किया। 1500 करोड़ रुपये से अधिक की आर्थिक गड़बड़ियों का खुलासा हुआ। प्रशांत मेहता ने बताया कि पूर्व ट्रस्टी विजय और किशोर मेहता ने दस्तावेजों में हेरफेर कर अपने परिवार को ट्रस्ट में शामिल कर लिया था। बेल्जियम और दुबई में स्थित NRI पूर्व ट्रस्टियों पर गबन का आरोप लगाया गया है। ट्रस्ट ने जांच के बाद बांद्रा मजिस्ट्रेट कोर्ट में केस दर्ज करवाया, जिसके बाद FIR दर्ज हुई।
कैसे हुआ घोटाले का खुलासा
साल 2002 में लीलावती हॉस्पिटल के संस्थापक किशोरी मेहता बीमार पड़ गए और इलाज के लिए विदेश चले गए। उसी दौरान उनके भाई विजय मेहता ने ट्रस्ट का पूरा नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया। आरोप है कि उन्होंने कागजों में हेरफेर करके अपने बेटे और भतीजों को ट्रस्ट में शामिल करवा लिया और किशोरी मेहता को ट्रस्ट से बाहर कर दिया। 2016 में किशोरी मेहता ने दोबारा ट्रस्ट का कार्यभार संभाला और 2024 में उनके निधन के बाद उनके बेटे प्रशांत मेहता स्थायी ट्रस्टी बने। प्रशांत मेहता ने ट्रस्ट की गड़बड़ियों को उजागर करने के लिए Chetan Dalal Investigation and Management Services और ADB & Associates नामक ऑडिट कंपनियों को नियुक्त किया। ऑडिट रिपोर्ट में ट्रस्ट से जुड़े फंड की बड़े पैमाने पर हेराफेरी का खुलासा हुआ।
अस्पताल में काला जादू का दावा
यह मामला सिर्फ आर्थिक हेराफेरी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अस्पताल में काला जादू किए जाने का भी आरोप लगाया गया है। दिसंबर 2024 में कुछ पूर्व कर्मचारियों ने अस्पताल में काले जादू से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी दी। जब ट्रस्ट ने खुदाई करवाई, तो अस्पताल परिसर में 8 रहस्यमयी कलश पाए गए। इन कलशों के अंदर मानव हड्डियां, खोपड़ियां, बाल और चावल भरे हुए थे, जिससे यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि अस्पताल में काले जादू की गतिविधियां की जाती थीं। प्रशांत मेहता के अनुसार, यह सब कुछ पूर्व ट्रस्टियों के कार्यकाल के दौरान हुआ।
कोर्ट ने ASI को लगाई फटकार
इस मामले की सुनवाई बॉम्बे हाईकोर्ट में भी हुई। न्यायाधीश रोहित रंजन अग्रवाल ने ASI के वकील से सवाल किया कि उन्हें 2024 में ही इन गड़बड़ियों का पता क्यों चला? कोर्ट ने कहा कि जब 2010 और 2020 में ट्रस्ट में यह हेराफेरी हो रही थी, तब ASI क्या कर रही थी? ASI के वकील ने बताया कि उन्होंने मामले में FIR दर्ज की है और कई गवाहों से पूछताछ की जा रही है। कोर्ट ने आदेश दिया कि अस्पताल की बाहरी दीवारों और ट्रस्ट से जुड़े सभी वित्तीय रिकॉर्ड की विस्तृत जांच की जाए।
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