
जकार्ता। पिछले कई दिनों से सुलग रहा इंडोनेशिया (Indonesia) का सबसे ऊंचा ज्वालामुखी माउंट सेमेरू (Mount Semeru) रविवार को आखिर फट गया। 12,000 फीट ऊंचे पहाड़ की चोटी पर से लावा, गर्म राख और इतनी तेज गैसें निकलीं कि वो आसपास के तमाम गांवों और खेतों तक पहुंच गईं। इसकी चपेट में आए इलाके में कई किमी तक काला धुआं छा गया। बताया जा रहा है कि माउंट सेमेरू कई दिनों से सुलग रहा था और मानसूनी बारिश के चलते इसका लावा डोम (Lava Dome) टूट गया। इसकी वजह से गर्म राख, गैस और लावा की नदियां बह निकलीं। करीब डेढ़ किमी तक धुएं का गुबार छाया है। इसके कई वीडियो सामने आए हैं।
BREAKING: Indonesia’s Mount Semeru has explosively erupted, sending pyroclastic density currents — ‘avalanches’ of extremely hot gas and debris — screaming into several valleys.
Quick thread ? (coming shortly): pic.twitter.com/pUKNcBBdP3
— Dr Robin George Andrews ? (@SquigglyVolcano) December 4, 2022
राख के ढेर में ढंके गांव, दिन में जलानी पड़ी लाइट
इस घटना के बाद ज्वालामुखी के आसपास मौजूद कई गांव राख के ढेर में ढंक गए हैं। यहां से जितनी दूर नजर जा रही है, वहां तक आसमान काला दिख रहा है। इंडोनेशिया के नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट एजेंसी के प्रवक्ता अब्दुल मुहारी बताते हैं कि काले धुएं के चलते कई किमी दूर के लोगों को दिन में भी लाइट जलानी पड़ रही है। घटना के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। जिन गांवों में राख का ढेर लगा है, वहां के लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाने की कवायद जारी है।
Gunungapi Semeru kembali muntahkan Awan Panas Guguran (APG) pada hari Minggu (4/12) sejak pukul 02.46 WIB, dengan kolom abu teramati berwarna kelabu dengan intensitas sedang hingga tebal ke arah tenggara dan selatan setinggi kurang lebih 1.500 meter di atas puncak. #Semeru #APG pic.twitter.com/v3mtSR4ILW
— BNPB Indonesia (@BNPB_Indonesia) December 4, 2022
जकार्ता से 800 किमी दूर है माउंट सेमेरू
इंडोनेशिया में 121 ज्वालामुखी सक्रिय हैं। जो ज्वालामुखी (Mount Semeru) फटा है, वह इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता से 800 KM दूर दक्षिणपूर्व स्थित जावा में है। माऊंट सेमेरू के अलावा जावा में तमाम सक्रिय ज्वालामुखी हैं। लेकिन माउंट सेमेरू सबसे खतरनाक और सबसे ऊंचा है। पिछले साल भी माउंट सेमेरू में विस्फोट हुआ था। उस वक्त 51 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 10 हजार लोगों का रेस्क्यू कर सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया था।