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टेस्ला की भारत में एंट्री! मस्क और मोदी की मीटिंग के बाद… इन जगहों पर खुल सकती है फैक्ट्री, जानिए कितनी होगी कीमत

नई दिल्ली। अमेरिकी इलेक्ट्रिक वाहन (EV) निर्माता कंपनी टेस्ला भारत में अपनी मैन्युफैक्चरिंग सुविधा स्थापित करने की योजना पर तेजी से काम कर रही है। कंपनी के अधिकारी अप्रैल में भारत का दौरा करेंगे, जहां वे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और अन्य प्रमुख मंत्रालयों के अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। इस बैठक में टेस्ला की निवेश योजनाओं, संभावित फैक्ट्री स्थानों और भारत में इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण से संबंधित सरकारी नीतियों पर चर्चा होगी।

भारत में टेस्ला कर सकती है भारी निवेश

सूत्रों के अनुसार, टेस्ला भारत में 3 से 5 अरब डॉलर (करीब 25,000 से 41,000 करोड़ रुपए) का निवेश कर सकती है। यह फैसला भारत सरकार की नई EV नीति से प्रेरित माना जा रहा है, जो स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग के लिए प्रतिबद्ध कंपनियों को आयात शुल्क में रियायतें देने की पेशकश करती है। टेस्ला की इस योजना से यह संकेत मिलता है कि कंपनी भारत के बढ़ते EV बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

भारत सरकार की नई EV नीति

भारत सरकार ने हाल ही में एक नई इलेक्ट्रिक वाहन (EV) नीति पेश की है, जिसमें खासतौर पर उन कंपनियों को कर रियायतें दी जाएंगी जो भारत में अपना मैन्युफैक्चरिंग प्लांट स्थापित करेंगी।

नई नीति के अनुसार, अगर कोई कंपनी भारत में फैक्ट्री लगाती है और कम से कम 500 मिलियन डॉलर (करीब 4,100 करोड़ रुपए) का निवेश करती है, तो उसे 15% की कम ड्यूटी पर हर साल 8,000 इलेक्ट्रिक वाहन आयात करने की अनुमति मिलेगी। हालांकि, कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि कम से कम 50% निवेश तीन साल के भीतर किया जाए और अगले पांच वर्षों में उत्पादन शुरू हो।

सरकार की इस नीति का उद्देश्य विदेशी कंपनियों को आकर्षित करना और स्थानीय स्तर पर EV निर्माण को बढ़ावा देना है।

किन शहरों में खुल सकती है टेस्ला की फैक्ट्री

टेस्ला ने भारत में अपनी फैक्ट्री के लिए संभावित स्थानों की तलाश शुरू कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, महाराष्ट्र और गुजरात टेस्ला के लिए प्रमुख विकल्प बन सकते हैं।

महाराष्ट्र: पुणे (चाकन औद्योगिक क्षेत्र) और छत्रपति संभाजी नगर (औरंगाबाद) टेस्ला के लिए संभावित स्थान हो सकते हैं। यह क्षेत्र पहले से ही कई वैश्विक ऑटोमोबाइल कंपनियों का हब है, जिससे टेस्ला को आवश्यक इन्फ्रास्ट्रक्चर और सप्लाई चेन का लाभ मिल सकता है।

गुजरात: गुजरात ने पहले ही ऑटोमोबाइल और बैटरी निर्माताओं से बड़े निवेश आकर्षित किए हैं। महाराष्ट्र की तुलना में गुजरात का लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर और नीतिगत समर्थन बेहतर माना जा रहा है।

टेस्ला को अपने निर्णय में सरकारी रियायतों, लॉजिस्टिक्स, श्रम लागत और बाजार की मांग जैसे कई कारकों को ध्यान में रखना होगा।

EV बाजार में भारत की स्थिति

भारत में EV बाजार अभी शुरुआती दौर में है। भारत में पिछले साल करीब 100,000 इलेक्ट्रिक गाड़ियां बिकीं, जबकि चीन में यह संख्या 1.1 करोड़ थी। हालांकि, भारत सरकार 2070 तक नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल करना चाहती है और देश में अमीरों की संख्या भी बढ़ रही है। ऐसे में इलेक्ट्रिक गाड़ियों के लिए भारत एक बड़ा संभावित बाजार बन सकता है।

सरकार ने 40,000 डॉलर से ज्यादा कीमत वाली गाड़ियों पर बेसिक कस्टम ड्यूटी 110% से घटाकर 70% कर दी है, जिससे टेस्ला जैसी कंपनियों को लाभ हो सकता है।

टेस्ला की भारत में एंट्री

टेस्ला कई वर्षों से भारत में बड़े निवेश की योजना बना रही थी लेकिन टैरिफ में कटौती की मांग के कारण अब तक यह योजना अटकी हुई थी। एलन मस्क ने 2016 में पहली बार ‘Model 3’ को भारत में लॉन्च करने की घोषणा की थी। इसकी कीमत 70 से 90 लाख रुपए रखी गई थी और कुछ समय के लिए प्री-बुकिंग भी शुरू हुई थी। हालांकि, आखिरी वक्त पर टेस्ला ने अपना यह प्लान ड्रॉप कर दिया था।

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