
भोपाल में बुधवार को अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष-2025 के अवसर पर राज्य स्तरीय सम्मेलन आयोजित किया गया। इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में भी गुजरात की तर्ज पर दूध पर बोनस देने की योजना बनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि सहकारी क्षेत्र में सरकार ट्रांसपेरेन्सी लाने और किसानों को अधिक लाभ पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
दूध और मत्स्य पालन को मिलेगा बढ़ावा
सीएम ने कहा कि मध्यप्रदेश में सहकारी आंदोलन को तेज किया जाएगा। दूध उत्पादन के साथ-साथ मत्स्य पालन को भी बढ़ावा देने की योजना बनाई जा रही है। हाल ही में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में सहकारी क्षेत्र को उद्योगों के साथ जोड़ने की पहल की गई है। अगले चार वर्षों में सहकारी आंदोलन को एक नए मुकाम पर ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।
सहकारिता में ट्रांसपेरेन्सी जरूरी
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले सहकारी क्षेत्र में ट्रांसपेरेन्सी की कमी थी और कई बार परिपत्र (सर्कुलर) तो जारी हो जाते थे। लेकिन उन्हें दबा दिया जाता था। उन्होंने कहा कि वे स्वयं भी सहकारिता से जुड़े रहने के बावजूद इसकी जटिलताओं का शिकार हुए हैं।
पुराना अनुभव साझा किया
मुख्यमंत्री ने अपने पुराने अनुभव साझा करते हुए बताया कि 1990-92 में उज्जैन में सहकारी समिति बनाने की कोशिश के दौरान उन्हें कई दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में बार-बार नए दस्तावेज मांगे जाते थे और जानबूझकर प्रक्रिया को जटिल बनाया जाता था। उन्होंने कहा कि अब ऐसी परेशानियों को खत्म कर पारदर्शिता और सुगमता लाने का प्रयास किया जाएगा।
मंत्री के आदेश पर मिली मंजूरी
सीएम ने बताया कि जब उन्होंने इस विषय में तत्कालीन मंत्री लक्ष्मी नारायण शर्मा से संपर्क किया, तो उनके सख्त निर्देश के बाद ही रजिस्ट्रेशन को मंजूरी मिली। उन्होंने कहा कि यह उदाहरण सहकारिता की पुरानी व्यवस्था की जटिलताओं को दर्शाता है, जिसे अब बदला जाएगा।
बता दे कि इस कार्यक्रम में सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग, अपर मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल, डीपी आहूजा समेत सहकारिता, मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।