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Pregnancy Precautions :प्रेग्नेंसी में इन केमिकल्स से बढ़ सकती हैं मुश्किलें! मां और बच्चे दोनों पर पड़ सकता है असर

गर्भावस्था के दौरान कॉस्मेटिक्स, प्लास्टिक और पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स में मौजूद कुछ केमिकल्स मां और गर्भ में पल रहे शिशु के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं। नई स्टडी में इन रसायनों को लेकर चिंता जताई गई है। जानिए कौन से केमिकल्स मिले, उनका असर क्या हो सकता है और किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
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प्रेग्नेंसी में इन केमिकल्स से बढ़ सकती हैं मुश्किलें! मां और बच्चे दोनों पर पड़ सकता है असर
गर्भावस्था में कॉस्मेटिक्स और प्लास्टिक का ज्यादा इस्तेमाल हो सकता है नुकसानदायक

गर्भावस्था के दौरान इस्तेमाल होने वाले कुछ कॉस्मेटिक्स, प्लास्टिक और पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स को लेकर नई रिसर्च में चिंता जताई गई है। अध्ययन में पाया गया कि कई गर्भवती महिलाओं के शरीर में ऐसे रसायन मौजूद थे, जो हार्मोन के सामान्य कामकाज को प्रभावित कर सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इनका असर मां के साथ-साथ गर्भ में पल रहे बच्चे पर भी पड़ सकता है।

कैसे की गई रिसर्च?

इस अध्ययन में 641 स्वस्थ गर्भवती महिलाओं को शामिल किया गया। गर्भावस्था के अलग-अलग चरणों में उनके यूरिन सैंपल की जांच की गई, ताकि शरीर में मौजूद रसायनों की मात्रा का पता लगाया जा सके।

कौन से केमिकल्स मिले?

जांच में मिथाइलपैराबेन (Methylparaben) सबसे अधिक मात्रा में पाया गया। यह एक प्रिजर्वेटिव है, जिसका इस्तेमाल आमतौर पर कॉस्मेटिक्स, स्किन केयर प्रोडक्ट्स, लोशन, शैंपू और कई पर्सनल केयर उत्पादों में किया जाता है। इसके अलावा मोनोएथाइल फ्थेलेट (Monoethyl Phthalate) भी अधिक मात्रा में मिला। यह रसायन प्लास्टिक से बने सामान और सिंथेटिक खुशबू वाले कई उत्पादों में इस्तेमाल होता है।

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क्यों बढ़ रही है चिंता?

ये दोनों रसायन एंडोक्राइन-डिसरप्टिंग केमिकल्स (Endocrine Disrupting Chemicals) की श्रेणी में आते हैं। यानी ये शरीर के हार्मोन सिस्टम के कामकाज में बाधा डाल सकते हैं। हार्मोन गर्भावस्था के दौरान बच्चे के विकास में अहम भूमिका निभाते हैं, इसलिए इन रसायनों का अधिक संपर्क चिंता का विषय माना जा रहा है।

दूसरी तिमाही में सबसे ज्यादा मिला असर

रिसर्च में यह भी पाया गया कि गर्भावस्था की दूसरी तिमाही में इन रसायनों का स्तर सबसे अधिक था। यही वह समय होता है, जब गर्भ में पल रहे शिशु के अंगों और शरीर का तेजी से विकास होता है। ऐसे में हार्मोन को प्रभावित करने वाले रसायनों का ज्यादा संपर्क भविष्य में बच्चे के स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है।

बच्चे के स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ सकता है?

अध्ययन के अनुसार, जिन महिलाओं के शरीर में इन रसायनों का स्तर अधिक था, उनके नवजात शिशुओं में जन्म के समय वजन, लंबाई और विटामिन-डी के स्तर में अंतर देखा गया। हालांकि, शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि इन संबंधों की पूरी पुष्टि के लिए अभी और बड़े स्तर पर अध्ययन की जरूरत है।

गर्भवती महिलाएं क्या सावधानी बरतें?

विशेषज्ञों का कहना है कि इन रसायनों के इस्तेमाल और निगरानी को लेकर सख्त नियम बनाए जाने की जरूरत है। साथ ही गर्भवती महिलाओं को भी कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए।

  • प्लास्टिक का अनावश्यक इस्तेमाल कम करें।
  • जरूरत पड़ने पर ही कॉस्मेटिक्स और पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करें।
  • कम रसायन वाले या सुरक्षित उत्पाद चुनें।
  • किसी भी नए प्रोडक्ट का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर हो सकता है।

नोट- यह अध्ययन संभावित जोखिम की ओर इशारा करता है। इससे यह साबित नहीं होता कि ये रसायन हर गर्भवती महिला या हर शिशु में निश्चित रूप से नुकसान पहुंचाएंगे। 

Shivani Gupta
By Shivani Gupta

शिवानी गुप्ता | MCU, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में ग्रेजुएशन | 9 वर्षों की टीवी और डिजिटल तक की य...Read More

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