
पन्ना। अपने टाइगर्स के लिए प्रसिद्ध एमपी का पन्ना टाइगर रिज़र्व (PTR) फिर सुर्खियों में आ गया है। यहां के बफर एरिया में पहली बार काला भेड़िया (Black Wolf) दिखाई दिया है, जिसे वन्य जीव प्रेमियों के लिए बड़ी खुशखबरी माना जा रहा है। इन बेहद दुर्लभ माने वाले जीवो को पहली बार कैमरे में कैद किया गया है और ये फोटो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहे हैं।
बाघ के बाद दुर्लभ ब्लैक वुल्फ के भी होंगे दीदार
पन्ना टाइगर रिज़र्व में जहाँ बाघ, तेंदुआ, भालू, चीतल, सांभर, चिंकारा व चौसिंगा जैसे वन्य जीव मिलते हैं। अब यहां पर लगभग विलुप्त हो चुके दुर्लभ काले भेड़िए की मौजूदगी के पुख्ता सबूत मिले हैं। ये काले भेड़िये छोटे से झुंड में किशनगढ़ बफ़र के जंगल से गुजरने वाले हाइवे के नजदीक पहली बार देखे गए। इससे पहले PTR में ही अगस्त 2021 में फिशिंग कैट के प्राकृतिक आवास की भी पुष्टि हुई थी।

पहली बार दिखे काले भेड़िए
किसी समय पन्ना से टाइगर लुप्त हो चुके थे, लेकिन उनके पुनर्वास के बाद अब यहां का जंगल बाघों से आबाद हो चुका है। इन जंगलों में तेंदुओं भी खूब मिलते हैं। एमपी को टाइगर स्टेट के साथ ही लेपर्ड स्टेट का दर्जा दिलाने में पन्ना टाइगर रिज़र्व की अहम भूमिका रही है। काले भेड़िया पन्ना के अलावा अब तक प्रदेश में कहीं देखे भी नहीं गए हैं।
शिकार करने में होते हैं माहिर
राज्य वन्य प्राणी बोर्ड के पूर्व सदस्य हनुमंत प्रताप सिंह (रजऊ राजा) के मुताबिक आने वाले समय में यदि इनकी संख्या बढ़ती है तो इससे पर्यटन का दायरा बढ़ेगा। इन विलुप्त प्रजाति के दुर्लभ भेड़ियों की तस्वीर रूपेश कुकाडे नाम के फोटोग्राफर ने किशनगढ़ जंगल से गुजरने वाले हाइवे के पास ली है। देखा जाए तो यहां अब तक भूरे रंग के भेड़िये नजर आते हैं। वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट्स के मुताबिक काले भेड़िए भी शिकार करने में माहिर होते हैं।
एक चिंता की बात यह भी
पर्यावऱण के क्षेत्र में कम करने वाली संस्था बीएच लैब ने इन काले भेड़ियों की तस्वीर अपने सोशल मीडिया एकाउंट “X” पर पोस्ट की है, जिसमें कहा गया है कि पहली बार भारत में काले भेड़ियों की तस्वीर खींची गई है। तस्वीर में काले रंग के दो भेड़िए दिखाई दे रहे हैं। अतीत में अमेरिका सहित कई देशों से ये पाए जाते थे। बीएच लैब द्वारा दी जा रही जानकारी के मुताबिक यह रंग भूरे भेड़ियों के कुत्तों के साथ प्रजनन के कारण होता है। सामान्य तौर पर भारत में इंडियन ग्रे वुल्फ और हिमालयन वुल्फ ही पाए जाते हैं। ग्रे वुल्फ राजस्थान, गुजरात, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश, जबकि हिमालयन भेड़िया हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर, उत्तराखंड और सिक्किम में मिलता है। दोनों ही लुप्तप्राय प्रजातियों के शामिल है। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के शेड्यूल वन के तहत ये संरक्षित जीव हैं। भारतीय वन्यजीव संस्थान द्वारा 2022 में की गई एक रिसर्ट में देश में केवल 3100 ग्रे भेड़ियों के बचे होने की बात कही गई थी। यही वजह है कि भेड़ियों को भी बाघों की तरह संरक्षण के नजरिए से बेहद अहम माना जाता है।
(इनपुट – संदीप विश्वकर्मा, पन्ना)
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