
हर्षित चौरसिया-जबलपुर। कोयला खदानों से कोयला निकाले जाने के बाद डंप की गई मिट्टी से बने पहाड़ों व खदानों (माइनिंग) के आसपास के क्षेत्र की सेहत सुधारने का काम देशभर में चलेगा। इसी के तहत कोल इंडिया लिमिटेड ने देश के तीन राज्यों में यह काम उष्णकटिबंधीय वन अनुसंधान (टीएफआरआई) को सौंपा है। इन राज्यों में मध्य प्रदेश के साथ छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र भी शामिल हैं। इसमें से हर राज्य में 6-6 खदानों पर काम किया जाएगा। 5 साल की अवधि वाले ईको रिहैबिलिटेशन डिग्रेटेड कोल माइन इन डिफरेंट एग्रो क्लाइमेटिक जोन ऑफ इंडिया प्रोजेक्ट के तहत मप्र, छग व महाराष्ट्र में चिह्नित खदानों के क्षेत्र वैज्ञानिकों को पौधरोपण करना है।
देशभर में 39 खदानें चिह्नित
जानकारी के अनुसार देशभर में कोल इंडिया ने 39 खदानों को चिह्नित किया है। इसमें करीब 200 हेक्टेयर पर रिहैबिलिटेशन का कार्य होगा। तीन राज्यों की 18 खदानों में टीएफआरआई 90 हेक्टेयर क्षेत्र को संवारने का काम करेगा। जिन खदानों के क्षेत्र पर रिहैबिलिटेशन होना है, वे खदानें वेस्टर्न कोल, नार्दन कोल, साउथ ईस्ट कोल इंडिया लिमिटेड की हैं।
ऐसे होगा काम
सर्वे: वैज्ञानिकों के मुताबिक खदान एरिया के रिहैबिलिटेशन के लिए पहले चरण में सर्वे किया जाएगा। इसमें ये देखा जाएगा कि कितने क्षेत्र में पौधरोपण हो सकता है।
मिट्टी की सैंपलिंग: इसके बाद पौधरोपण के लिए इस क्षेत्र व डंप की गई मिट्टी सहित अन्य के सैंपल लिए जाएंगे। इसमें ये देखा जाएगा कि ये मिट्टी किस तरह के पौधों के लिए अनुकूल है।
पौधों का चुनाव: इसके बाद आसपास के क्षेत्रों के रहवासियों से भी जानकारी ली जाएगी, इसके अलावा कौन से पौधे यहां रोपे जाएंगे, इसका चुनाव किया जाएगा।
इसलिए जबलपुर को मिला प्रोजेक्ट : टीएफआरआई जबलपुर मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ व महाराष्ट्र राज्य का मुख्यालय है। लिहाजा कोल इंडिया ने टीएफआरआई जबलपुर के वैज्ञानिकों को यह प्रोजेक्ट दिया है।
सरकार की व्यवस्था : खनिज खनन के बाद संबंधित कंपनी को उसकी फिलिंग करना जरूरी है। इसके बाद कंपनी को उसमें हरियाली भी करना आवश्यक होता है। इसके लिए कंपनियां खदान क्षेत्र में पौधरोपण के लिए वन विभाग और अथवा अन्य पौधरोपण के लिए एजेंसियों से काम को कराती हैं।
तीन राज्यों में होगा काम
कोल इंडिया द्वारा एक प्रोजेक्ट दिया गया है। तीन राज्यों की 18 खदान क्षेत्रों के रिहैबिलिटेशन कार्य होना है। इसमें 90 हेक्टेयर के क्षेत्र पर काम करना है पहले चरण में हम इन क्षेत्रों में सर्वे करेंगे। इसके बाद पौधरोपण होगा। – डॉ. अविनाश जैन, प्रोजेक्ट प्रिंसिपल इन्वेटिगेटर टीएफआरआई जबलपुर